कश्मीर में स्कूल फुंकते ही खुल जाता है नया मदरसा, पाक-परस्तों की नई साज़िश

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समाचार मिल रहा है कि कश्मीर घाटी के अनंतनाग जिले के ऐशमुक़ाम गाँव में जवाहर नवोदय विद्यालय को आग लगा दी गयी.

8 जुलाई को जब कश्मीर घाटी में बुरहान वानी का एनकाउंटर हुआ तब से ये 25वां स्कूल है जिसे आग लगाई गई है.

ध्यान देने योग्य बात ये है कि सिर्फ उन स्कूलों को आग लगाई जा रही है जो बड़े शहरों से दूर दूरदराज के गाँवों में हैं. वो गाँव जिनमें शिक्षा का एकमात्र साधन ये सरकारी स्कूल ही हैं.

और इन गांवों की और इन स्कूलों की लोकेशन ऐसी है, ये ऐसे दुर्गम इलाकों में हैं कि यहां के बच्चे किसी अन्य स्कूल में जा ही नहीं सकते.

जो सबसे खतरनाक बात सामने आ रही है वो ये कि जैसे ही सरकारी स्कूल को आग लगाई जाती है, इलाके की किसी मस्जिद में रातों रात बच्चों की ‘पढ़ाई-लिखाई, शिक्षा-दीक्षा’ के लिए एक मदरसा खुल जाता है.

इस पूरे षड्यंत्र के पीछे कारण ये बताया जा रहा है कि जब से दिल्ली में मोदी सरकार आयी है, सीमा पर चौकसी बहुत बढ़ गयी है. सेना और बीएसएफ़ चौकस है.

पाकिस्तान की गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा है, सर्जिकल स्ट्राइक हुई है, नियंत्रण रेखा पर आतंकियों के ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करके तहस नहस किया जा चुका है.

इसलिए पाकिस्तान के लिए काश्मीर घाटी में आतंकियों की घुसपैठ कराना बहुत मुश्किल हो गया है.

इसके अलावा पाकिस्तान को इन आतंकियों के प्रशिक्षण शिविरों और launching pads को भी सर्जिकल स्ट्राइक के डर से सीमा से लगभग 50-60 किमी दूर शिफ्ट कर दिया गया है.

पाकिस्तान की सरकार, सेना और ISI समझ गयी है कि पीओके में ट्रेनिंग देकर भारत में घुसपैठ अब असंभव हो गयी है.

और कश्मीर में अलगाववाद और आतंक की आग सुलगती रहे इसके लिए ज़रूरी हो गया है कि कश्मीर में, घर में ही आतंकी पैदा किये जायें. इसके लिए ज़रूरी है कि कश्मीरियों के बच्चे स्कूल छोड़ मदरसों में पढ़ें.

बच्चे मस्जिदों में चलने वाले मदरसों में तभी आएंगे जब स्कूल फूँक के बंद कर दिए जाएं. इसी योजना के तहत अलगाववादी दूर दराज के गाँवों के इन स्कूलों को निशाना बना रहे हैं.

पर कश्मीर और देश दुनिया के शांतिदूतों को ये समझ लेना चाहिए कि उनके ये लीडरान, जो उनको स्कूलों से हटा के मस्जिदों-मदरसों में धकेलना चाहते हैं, उनके खुद के बच्चे मदरसों में नहीं बल्कि देश के सबसे महंगे प्राइवेट स्कूल में और विदेशी यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ते हैं.

वो बहुराष्ट्रीय कंपनियों में मोटे पैकेज की नौकरी करते है, और उनकी बीवियां मिनी स्कर्ट और खुले गले के ब्लाउज़ पहन के घूमती हैं, जबकि वो तुमसे कहते हैं कि ऐ मोमिनों अपनी बीबियों से कहो परदे में रहे.

ऐ कश्मीरियों, ऐ मोमिनों, इन मदरसों और इन मुल्ला मौलवियों से बचो और अपने बच्चों को बचाओ.

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