नहीं चाहिए उसे खैरात का घटिया चाईनीज़ फोन, कमा के खरीदने में सक्षम है वो

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उत्तरप्रदेश के युवा मुख्यमंत्री ने कल घोषणा की कि अगर दोबारा सत्ता में आये तो गरीबों को पेंशन देंगे. इससे पहले ये घोषणा कर चुके हैं कि युवाओं को मुफ्त स्मार्टफोन बांटेंगे.

पिछली बार जब ये चुनाव में उतरे थे तो इन्होने चुनावी वादा किया था कि युवाओं को मुफ्त लैपटॉप देंगे.

जब इन्होने मुफ्त लैपटॉप बांटने शुरू किये तो जो समारोह होता उसमें युवा मोदी-मोदी का मन्त्र जपते.

इलाहाबाद के एक कार्यक्रम में तो युवाओं ने इनके हाथ से लैपटॉप लिया और वहीं मंच पर ही मोदी-मोदी का जप शुरू कर दिया.

इन्होने 10-12 लैपटॉप बांटे, फिर इस मोदी गान से खिसिया कर कार्यक्रम बीच में ही छोड़ के चले गए.

जब लोकसभा चुनाव में पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया और मोदी लहर में सब बह गया तो इन्होने तत्काल प्रभाव से लैपटॉप वितरण बंद कर दिया.

अखिलेश यादव को नयी पीढ़ी का नयी सोच का नया नेता माना जाता है. राहुल गांधी की माफ़िक़.

पर ये दोनों युवा नेता मुफ्तखोरी की राजनीति और मुफ्तखोरी के वादों से ऊपर नहीं उठ पा रहे. इन दोनों के पास देश और प्रदेश के विकास का न कोई रोडमैप है, न कोई विज़न.

जब NDA (भाजपा+जदयू) की सरकार बिहार में बनी तो नितीश बाबू ने सबसे पहले खराब क़ानून व्यवस्था और जंगल राज का खात्मा कर क़ानून का राज स्थापित किया.

उसके बाद प्रदेश की खस्ताहाल सड़कों को बनाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया. सिर्फ 3 साल में नीतीश बाबू ने प्रदेश का कायाकल्प कर दिया और पूरे प्रदेश में उच्च गुणवत्ता वाली सड़कों का जाल बिछा दिया.

उनकी अगली प्राथमिकता थी बिजली. उन्होंने सार्वजनिक मंच से वादा किया कि अगले दो साल में अगर बिजली की आपूर्ति नहीं सुधार सका तो वोट मांगने नहीं आऊंगा.

नितीश बाबू ने जिस तरह अपने पहले शासन काल में बिहार को गर्त से निकाला वो काबिले तारीफ़ है.

वो अलग बात है कि बाद में वो पथ भ्रष्ट हो कर लालू की गोद में जा बैठे और अब बिहार को पुनः जंगल राज की ओर धकेल रहे हैं.

मैंने पिछले 4 साल में एक बार भी अखिलेश यादव के मुँह से ये नहीं सुना कि मैं प्रदेश में 24 घंटे विद्युत् आपूर्ति वो भी पूरी 220 वोल्ट, सुनिश्चित करूंगा.

या फिर ये कि प्रदेश की सड़कें हिना रब्बानी के गालों सी चिकनी बना दूंगा, या मैं प्रदेश में रोज़ी रोजगार उद्योग व्यापार का माहौल बनाऊंगा.

हमारा युवा मुख्यमंत्री चुनाव से पहले वादा कर रहा है कि गरीबों को पेंशन देगा. जनाब, पेंशन तो बूढ़े-बुज़ुर्ग, सेवानिवृत्त, नाकाम, दिव्यांग लोगों को दी जाती है.

आपके प्रदेश के लोग निकम्मे, कामचोर, लाचार, बूढ़े, सेवानिवृत्त नहीं हैं. यदि वो गरीब हैं तो इसलिए कि आपके प्रदेश में रोज़गार के अवसर नहीं है.

आज भी आपके गाँवों में औसत 6 घंटे और शहरों में सिर्फ 12 घंटे बिजली आती है. आज भी आपके प्रदेश में 30 किमी की यात्रा में 2 घंटे लग जाते हैं क्योंकि सड़क में गड्ढे नहीं बल्कि गड्ढों में सड़क है.

आपके प्रदेश में आज 4 लेन NH पर भी 100 किमी की यात्रा करने में रोडवेज़ की बस 4 घंटे ले लेती है.

आज आपका युवा दिल्ली, पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र में झुग्गी झोपडी में नारकीय जीवन बिता के 7000 रुपल्ली की नौकरी करने के लिए अभिशप्त है.

मुख्यमंत्री जी, मुफ्त स्मार्टफोन और गरीबों को पेंशन नहीं, गाँव में 24 घंटे बिजली का वादा कीजिये, infrastructure सुधारिये, क़ानून व्यवस्था सुधारिये.

फिर आपका युवा, आपकी गरीबी पेंशन और बेरोज़गारी भत्ते का मोहताज नहीं रहेगा, उसे आपकी खैरात का सस्ता घटिया चाईनीज़ फोन नहीं चाहिए, वो इतना सक्षम है कि कमा के फोन खरीद लेगा.

इस मुफ्तखोरी, हरामखोरी और कर्जमाफी की संस्कृति से ऊपर उठिये जनाब.

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