पूर्व NSA मेनन ने बताया, मुंबई हमले के बाद क्यों नहीं की सर्जिकल स्ट्राइक

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नई दिल्ली. भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) शिवशंकर मेनन की दिली तमन्ना थी कि मुंबई आतंकी हमके के बाद पाकिस्तान के आतंकी कैंपों को तबाह कर दिया जाए.

मेनन ने हाल ही में एक किताब ‘च्वाइसेस: इनसाइड द मेकिंग ऑफ इंडियाज़ फॉरेन पॉलिसी’ लिखी है, जिसमें यह जिक्र किया गया है.

पूर्व विदेश सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके शिवशंकर मेनन ने कहा कि मुंबई हमले के बाद वह पाकिस्तान स्थित आतंकवादी कैंप्स को तबाह करना चाहते थे.

उन्होंने बताया कि वह चाहते थे कि भारत पर हुए हमले के तुरंत बाद पाकिस्तान में लश्कर ए तैयबा के पोओके और मुरीदके स्थित कैंप और आईएसआई के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जाए.

26/11 हमले के समय शिवशंकर मेनन विदेश सचिव हुआ करते थे, जिन्हें बाद में यूपीए सरकार के कार्यकाल में नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) बना दिया गया था.

इस हमले के बाद उन्हें लगता था कि तीन दिन चले इस अटैक को पुरी दुनिया भर में टीवी पर दिखाया गया, जिससे भारतीय पुलिस और सुरक्षा बलों की छवि पर धब्बा लगा था, इसे सैन्य कार्रवाई से मिटाने में काफी वक्त लग जाएगा.

मेनन ने हाल ही में एक किताब (च्वाइसेस: इनसाइड द मेकिंग ऑफ इंडियाज़ फॉरेन पॉलिसी) लिखी है, जिसमें इन बातों का जिक्र किया गया है. इस किताब को अमेरिका और ब्रिटेन में रिलीज किया गया है.

उन्होंने लिखा, भारत ने तुरंत पाकिस्तान पर हमला इसलिए नहीं किया क्योंकि तब केंद्र सरकार को लगा कि पाकिस्तान पर हमला करने से ज्यादा फायदा, हमला ना करने पर मिलेगा.

उन्होंने बताया कि यदि पाकिस्तान पर उस समय हमला कर दिया जाता तो पूरी दुनिया पाकिस्तानी सेना के सपोर्ट में आ जाती, साथ ही उस समय चुनी गई आसिफ अली जरदारी की असैन्य सरकार को भी खतरा पैदा हो सकता था.

उन्होंने यह भी कहा कि पोओके और मुरीदके में आतंकि कैंप को तबाह करने से कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला था.

मेनन ने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं था कि 26/11 से पहले मुंबई में कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ था, लेकिन 26/11 जितना बड़ा कोई नहीं था.

उल्लेखनीय है कि साल 2008 में 26 से 28 नवंबर तक चले मुंबई आतंकी हमले में 26 विदेशियों समेत 166 लोगों की जान चली गई थी. हमला लश्कर-ए-तैयबा ने किया था.

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