चीन के सामानों की मांग 30 फीसदी गिरी, चीन ने कहा नुकसान भारत का

boycott chinese goods

नई दिल्‍ली. दिवाली के मौके पर देश के कई हिस्सों में चीन के बने समानों के बहिष्कार की मांग पर चीन ने भारत को चेतावनी दी है कि इससे भारत को ही ज्यादा नुकसान होगा.

चीन की दूतावास ने एक बयान में कहा, लंबे समय में, इस बहिष्कार से ना केवल चीन के सामानों की बिक्री प्रभावित होगी, इससे भारत में उपभोक्ताओं पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ेगा. बिना किसी उचित विकल्प के, चीन के माल के बहिष्कार से सबसे ज्यादा प्रभावित भारतीय व्यापारी और उपभोक्ता होंगे.

बयान में कहा गया है कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक देश है और 2015 में उसका निर्यात 2276.5 अरब डॉलर के बराबर था.

भारत में चल रही इस मुहिम का असर बाजारों पर पड़ रहा है. पिछले दिनों ट्रेडर्स बॉडी की ओर से किए गए सर्वे में पता चला था कि दिवाली से पहले चीनी उत्पादों की मांग में करीब 30 फीसदी की गिरावट आई है.

बयान में यह भी कहा गया कि इस दौरान भारत को किया गया निर्यात इसका मात्र दो प्रतिशत था, इसलिए भारतीय बहिष्कार का चीन पर अधिक असर नहीं होगा. चीन केवल इस बात को लेकर चिंतित है कि इससे चीनी इकाइयों की ओर से भारत में होने वाले निवेश पर बुरा असर होगा. साथ ही द्विपक्षीय सहयोग भी प्रभावित होगा. चीन और भारत के लोग ऐसा नहीं चाहेंगे.

उड़ी में सेना के शिविर पर हुये आतंवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के मद्देनजर भारत में चीन के सामानों की बहिष्कार की मांग उठ रही है क्योकि चीन हमेशा ही पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है.

इसी बयान में कहा गया है कि पिछले 15 साल में चीन और भारत के बीच 24 गुना ट्रेड हुआ है. 2000 में यह केवल 2.9 अरब डॉलर था तो 2015 में यह 71.6 अरब डॉलर हो गया है.

चीन, भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. जबकि, भारत चीन का साउथ एशिया में सबसे बड़ा और दुनिया में 9वां सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है.

चीनी दूतावास के बयान के मुताबिक़ के अनुसार, चीन दुनिया का सबसे बड़ा सामान एक्‍सपोर्ट करने वाला देश है. 2015 में चीन से 2276.5 अरब डॉलर के प्रोडक्ट्स एक्‍सपोर्ट किए गए थे. जहां तक नई दिल्ली की बात है तो उसे इसका केवल 2 फीसदी ही एक्‍सपोर्ट होता है.

बयान में कहा गया है कि अगर भारत में चीनी सामान का बहिष्कार जारी रहता है तो चीन पर तो इतना असर नहीं पड़ेगा, लेकिन भारतीय ट्रेडर्स जरूर मुश्किल में पड़ जाएंगे, क्‍योंकि दिवाली से महीनों पहले से वे बड़ी मात्रा में इम्पोर्ट शुरू कर देते हैं.

चीनी दूतावास ने यह भी कहा कि ऐसा नहीं हैं कि चीन भारत से कुछ नहीं लेता है. 2015 में चीन ने भारत से 2 अरब डॉलर की कॉटन, 10 करोड़ रुपए की ब्‍लैक टी आयात की थी. जिससे भारत के 12 लाख कॉटन किसानों और 50 हजार चाय किसानों को लाभ हुआ था.

इसके साथ ही भारत की फार्मा इंडस्‍ट्री के लिए 60 से 70 फीसदी से अधिक सामग्री चीन से ही आती है. चीन का भारतीय फार्मा इंडस्‍ट्री में एक अहम रोल है. ऐसे में अगर ये रिश्‍ते प्रभावित हुए तो इससे नुकसान ही होगा.

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