गांधी मैदान में नमो की हुंकार रैली और सीरियल ब्लास्ट्स की तीसरी सालगिरह

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27 अक्टूबर 2013…. आज भी याद है वह दिन जैसे कल की ही बात हो.
मोदी जी के साक्षात दर्शन के लिये कुछ भी करने को तैयार था. सारा घर एक तरफ था और मैं एक तरफ. मेरी ज़िद के आगे सभी को झुकना ही पड़ा और मैं चल पड़ा गाँधी मैदान.

रैली के लिये दूर दूर से लोग आये थे. कई तो एक दिन पहले से ही डेरा जमाये बैठे. “मोदी-मोदी” की गर्जना वातावरण में जोश ला रही थी.

भाजपा के कई वरिष्ठ नेता सभा को संबोधित कर रहे थे. फिर सैयद शाहनवाज़ हुसैन की बारी आई. उनके भाषण शुरू हुए बस कुछ ही मिनट हुए होंगे कि एक भीषण आवाज़ आई.

इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते शाहनवाज़ हुसैन ने कहा कि आप सभी चिंता न करें, बस का टायर फटा है.

जब मैं स्कूल था तब एक बार स्कूल के चैयरमैन का जन्मदिन था और सभी बच्चों में मिठाई समोसे के डब्बे बांटे जा रहे थे.

उन दिनों लालूराज था जिसमें छुटभैये 40 किलो वजन के सड़कछाप गुंडे भी बम के साथ घूमते थे.

अचानक बहुत तेज़ धमाका हुआ. घर आने पर पता चला कि स्कूल से बमुश्किल 20-25 फ़ीट की दूरी पर स्थित होलसेल दुकान के मालिक पर रंगदारी न देने पर बम से हमला किया गया. दुकानदार की किस्मत अच्छी थी कि उसे कोई नुकसान नहीं हुआ.

गाँधी मैदान में हुए धमाके से मुझे वही बात याद आ गयी कि यह टायर फटने की आवाज़ नहीं बल्कि बम का धमाका है किंतु मैंने संयम से काम लिया और इस बात को ज़ाहिर नहीं होने दिया.

कुछ देर बाद फिर धमाका हुआ और उसके बाद धमाकों की लड़ी लग गयी. मंच के संयोजक अफरातफरी की स्थिति रोकने के लिये कह रहे थे, “मोदी जी के आने की ख़ुशी सभी को है पर पटाखे न फोडें, लोगों को परेशानी हो सकती है”… पर उन पटाखों के फूटने का क्रम चलता ही रहा.

मोदी जी एयरपोर्ट पर पहुंचे ही थे कि उन्हें सीरियल ब्लास्ट्स की सूचना दे कर रैली में न आने की हिदायत दी गयी लेकिन फिर भी मोदी जी निडरतापूर्वक ने रैली में आने का फैसला किया.

बहुत ही ज़बरदस्त भाषण था. भाषण के बाद मोदी जी ने कहा, “मित्रों मुझसे वादा कीजिये कि आप सभी आराम से धीरे वापस जायेंगे, एक्सीडेंट नहीं करेंगे, आप सभी को कुछ नहीं होना चाहिये.”

घर पहुंचने पर स्थिति बहुत ही विकट थी. मेरा मोबाइल डिस्चार्ज हो चुका था और कॉल न लगने पर घर वाले यह मान चुके थे कि कुछ अनहोनी हो गयी है.

गाँधी मैदान में कई ज़िंदा बम भी मिले थे, जिनमें कुछ उस जगह पर लगाये गये थे जहाँ मैं खड़ा था. किस्मत अच्छी थी कि वे बम फटे नहीं.

आतंकवादियों का उद्देश्य रैली में भगदड़ मचा कर भारी क्षति पहुँचाना था किंतु ईश्वर की मर्ज़ी के आगे कोई साज़िश काम नहीं आई.

यह साज़िश इंडियन मुजाहिद्दीन नाम के आतंकवादी संगठन ने करवाई थी जिसमें जेडीयू के समस्तीपुर जिलाध्यक्ष का बेटा भी शामिल था.

वह दिन हमारी जीत का था. बिहार की जनता की जीत. मोदीजी के प्रति हमारे असीम प्रेम और विश्वास की जीत.

– शिवी स्निग्ध

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