प्रदीप कुमार पुण्य स्मरण : आनंद मठ के वन्दे मातरम गीत ने दिलाई पहचान

पश्चिम बंगाल में 4 जनवरी 1925 को ब्राह्मण परिवार में जन्में शीतल प्रदीप बटावली उर्फ प्रदीप कुमार फिल्म अभिनेता बनने के लिए रंगमंच से जुड़े.

बंगला फिल्म अलखनंदा, भूली नाय में अभिनय करने के बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा की ओर रुख किया. 1952 में प्रदर्शित फिल्म आनंद मठ में प्रदीप कुमार पहली बार मुख्य अभिनेता की भूमिका में दिखायी दिये.

इस फिल्म की सफलता के बाद अनारकली. ताजमहल, बहू बेगम, चित्रलेखा, नागिन जैसी फिल्मों से प्रदीप कुमार दर्शकों के चहेते कलाकार बन गये.
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निर्देशक व्ही शांता राम की फिल्म ‘सुबह का तारा ‘ और राजकपूर की ‘जागते रहो के बाद सीरी-फरहाद, दुर्गेश नंदिनी, बंधन, राजनाथ और हीर जैसी फिल्में का सिलसिला बन गया.

उन पर फिल्माये गीत दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ करते थे – जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा, जो बात तुझमें है तेरी तस्वीर में नही, पांव छू लेने दो फूलों को इनायत होगी, मन डोले मेरा तन डोले , दिल जो न कह सका, हम इंतजार करेंगे तेरा कयामत तक जैसे गीत इस कड़ी मे शामिल है.

प्रदीप कुमार की जोड़ी मीना कुमारी के साथ खूब जमी. 1969 में सुपरहिट फिल्म संबध में उन्होंने चरित्र भूमिका निभाई और सशक्त अभिनय से दर्शकों की वाहवाही लूट ली.

इसके बाद प्रदीप कुमार ने महबूब की मेहंदी, समझौता, दो अंजाने, धरमवीर, खट्ठामीठा, क्रांति, रजिया सुल्तान, जैसी कई सुपरहिट फिल्मों मे चरित्र भूमिकायेँ निभाकर दर्शकों का दिल जीत लिया.

फिल्मों के साथ साथ उन्होंने कई बंगला नाटकों मे भी अभिनय किया. चार दशक तक अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का प्यार पाने वाले प्रदीप कुमार 27 अक्टूबर 2001 को कोलकाता में इस दुनिया को अलविदा कह गये.
हार्दिक नमन एवं श्रद्धांजलि!

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