सात मंदिरों के शहर को रास्ता देने पीछे हट गया समुद्र

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वर्ष 2004 में आई सुनामी ने भारत में भारी तबाही मचाई थी. तमिलनाडु में जान-माल का काफ़ी नुकसान हुआ था.

महाबलिपुरम तट पर भारी तबाही हुई. यहाँ सुनामी का असर ये हुआ कि कुछ समय के लिए समुद्र 500 फ़ीट भीतर सिमट गया.

समुद्र ने पीछे हटते हुए वह राज खोल दिया जो सैकड़ों साल से उसके नमकीन पानी में दफ़्न था. उस रेत से बाहर आई एक छोटी सी नगरी, एक port city.

ये छोटा सा शहर जिसे हम क़स्बा भी कह सकते हैं, अपने भीतर छह मंदिरों को समेटे बना हुआ था.

इसे प्राचीन काल में ‘सप्तगौड़ा कहा जाता था यानि सात मंदिरों का शहर. तो उस दिन जब समुद्र पीछे हटा तो जो नज़ारा जिसने भी देखा भौचक रह गया.

सामने नज़र आ रहे थे मंदिरों के भग्नावेश और किसी सुसंस्कृत शहर की आधी-अधूरी संरचनाएं. ये खबर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (एएसआई) को मिली.

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माहौल ग़मगीन था इसलिए बिना शोरशराबे के एएसआई के पुरातत्ववेत्ता काम में जुट गए. समय कम था क्योकि समुद्र सामान्य होते ही अपनी जगह वापस आने वाला था.

यानि 500 मीटर का हिस्सा फिर पानी में समा जाने वाला था. कुदरत ने ये रहस्य कुछ ही वक्त के लिए प्रकट किया था.

हालाँकि उस छोटे से वक्त में पुराविद कुछ खास हासिल नहीं कर सके लेकिन इतना जरूर जान गए थे कि ये port city महाबलिपुरम के सात मंदिरों का प्रमाण दे रही है.

2005 में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया और नौसेना ने मिलकर उस डूब चुके क्षेत्र में लंबा खोजी अभियान चलाया.

समुद्र के भीतर उन्होंने एक 70 फ़ीट लंबी दीवार, दो डूबे हुए मंदिर, मार्गों की संरचनाएं खोज निकाली.

पुख्ता रिसर्च के बाद इस डूबे हुए शहर को 300 BC (ईसा पूर्व) के आसपास का माना जा रहा है.

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पुरातन कथा कहती है इंद्र ने ईर्ष्यावश महाबलिपुरम के बेहद खूबसूरत मंदिरों को डूबा दिया. वैज्ञानिक कहते है कि 925 AD (ईस्वी) में सुनामी ने इस शहर को डूबा दिया.

लोकोक्तियाँ गलत नहीं होती, उस वक्त देखने वालों को ये इंद्र का ही कहर नजर आया होगा.

उन डूबे हुए मंदिरों की झलक देखना हो तो महाबलिपुरम का ‘Shore temple’ देख सकते हैं.

यह मंदिर द्रविड वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है और ग्रेनाइट के ब्लॉक के साथ बनाया गया है. महाबलिपुरम में स्मारकों के समूह के रूप में, यह एक यूनेस्को विश्व विरासत स्थल है.

भगवान विष्णु को समर्पित इन मंदिरों का निर्माण दक्षिण भारत के प्रसिद्ध प्राचीन पल्लव राजवंश के शासनकाल में शुरू हुआ तथा राजा महेंद्रवर्मन द्वारा इनका प्रमुख भाग निर्मित करवाया गया.

तमिलनाडु का यह प्राचीन शहर अपने भव्य मंदिरों, स्थापत्य और सागर-तटों के लिए बहुत प्रसिद्ध है. सातवीं शताब्दी में यह शहर पल्लव राजाओं की राजधानी था.

और सबसे अंत में एक बहुत दिलचस्प मिथ की बात.

कहा जाता है कि महाबलिपुरम जैसे सात मंदिरो के शहर भारत, यूरोप और विश्व के कई क्षेत्रों में बनाए गए थे. इनमे लगभग 1100 साल तक घँटनाद होता रहा.

फिर समन्दर ने अपना आकार बढ़ाया और ये प्राचीन परम्परा विलुप्त हो गई. खो गए लहरों पर पूजा करने वाले मेधावी लोग.

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