नायिका Episode -16 : बरगद की चुड़ैल और श्मशान चम्पा

नायिका – मैं बता देती हूँ एक बार और मुझे मोबाइल नंबर नहीं चाहिए… नहीं चाहिए… नहीं चाहिए…..

विनायक – किसने कहा कि मैं दे रहा हूँ? देना होगा तो आपकी इजाज़त के बिना भी दे दूँगा, कौन रोक सकेगा मुझे? got it?? now please note it down, its 93001*****…. अर्ररे!!! ये क्या हरक़त है, हाथ छोड़ो मेरा…..

नायिका – नहीं प्लीज़ हाथ नहीं पकड़ सकती इसका मतलब ये नहीं कि तुम नंबर लिख दो…. हाथ ना पकड़ने के पीछे कारण है और नंबर ना लेने के पीछे तो बहुत बड़ा कारण है………….

विनायक – और क्या है वो कारण?

नायिका- – क्यों बताऊँ? तुमको हर बात क्यों बताऊँ मैं? तुमने डॉक्टर का नाम नहीं बताया अभी तक? ये Heartbeats तो थमने का नाम ही नहीं ले रही…

विनायक – मुझे इसलिए बताओ क्योंकि मुझे रोक दिया था नंबर बताने से और इसलिए बताओ क्योंकि मैं पूछ रहा हूँ और इसलिए बताओ क्योंकि बताना चाहती हो…. सिर्फ़ डॉक्टर का नाम नहीं ठीक कर सकेगा ना, उसके लिए तो डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा…

नायिका – वैसे भी तुम्हारा बर्थ-डे आ रहा है सितम्बर में, नंबर तो लेना ही पड़ेगा….  इस बीच कोई लड़ाई झगड़ा न हुआ तो….

विनायक – झगड़ा किससे???? मुझसे?????? Thanx a lot for making me laugh so loudly!!!
वो अजूबा दिन होगा और अब तो इंतज़ार रहेगा उस दिन का, जब मेरा झगड़ा होगा…

नायिका – देखो मैं बड़ी झगड़ालू किस्म की हूँ तुम्हें पता नहीं अभी…… झगड़ा तो होना ही है एक दिन….

विनायक – बात मेरी हो रही है, मैं झगड़ूँगा ही नहीं तो अकेले अकेले कब तक सर फोड़ोगी. मैंने कहा न कि उस दिन का इंतज़ार रहेगा…
और बिल्कुल ना डरिए मैं फोन नंबर नहीं दूँगा…..

नायिका – और हाँ, मैं डॉक्टर के पास नहीं जाऊँगी, तुम किसी वैद्य या नीम हक़ीम को भेज दो ना मेरे पास…. कल रात शायद किसी की नज़र लग गई है….. अपलक तांकती हुई नज़रों की…

विनायक – किसने कहा था कि बिना काला टीका लगाए उसके पास जाना? अब जो हो गया सो हो गया, इसमें कोई वैद्य या हक़ीम काम नहीं आएगा, अब तो वो ही ठीक करेगा जिसकी नज़र लगी है, उससे कहो. या मैं कुछ टोटके जानता हूँ, पहले वो आज़मा लें? पर उसके लिए एक close up की ज़रुरत पड़ेगी और उधर के लोग तो close up का अर्थ ही नहीं जानते…..

नायिका – देखते हैं बच्चू कब तक नहीं झगड़ोगे…. लेकिन झगड़ोगे नहीं तो वो कैसे बढ़ेगा जो झगड़ने से बढ़ता है….

विनायक – ये दूसरों की बनाई हुई रवायतें हैं, हम एक नया चलन शुरू कर रहे हैं……..

नायिका – बहुत सारे ख़त लिखे हैं आज, रात को सबके जवाब लिखकर रखना…….

विनायक – हुक्म की तामील होगी…
आप तो गाना सुनिए जो अभी अभी अपलोड किया है

नायिका – तुसी जा रहे हो????? तुसी ना जाओ…..

विनायक – जाऊँगा नहीं तो आऊँगा कैसे?

नायिका – ….मैं आँख बंद कर लेती हूँ तुम चुपके से निकल जाना..

विनायक –  और कभी मुझ पर बहुत बोलने का इल्ज़ाम लगा था, फिर एक दिन चुप रहने की सज़ा मिली थी

नायिका – लो आँखें बंद करके बैठी रही तो चाय पीना भी भूल गई…… चलो अकेले ही तो पीना है ठंडी चाय ही पी लेती हूँ…..

विनायक – एक और संयोग, मैं भी चाय ही पी रहा हूँ और आपका ब्लॉग पढ़ रहा था और विरोध दर्ज़ करने के लिए पहला शब्द ही लिखा था, कि आपका मेल आ  गया…..

आता हूँ, आज गाड़ी धीरे चलाना, मैं वहाँ नहीं हूँ पर कभी कभी भ्रम भी हो जाता है. और हाँ मेल के सब्जेक्ट में फोन नंबर लिख दिया है… अब जो दिल चाहे करो…

नायिका – अरे यार क्यूँ दिया नंबर… क्यूँ दिया…. क्यूँ दिया बोलो क्यूँ दिया…………. ???????????????

तुमको लग लग रहा है कि तुम कोई टोटका कर रहे हो तो बता दूँ मैं भी बरगद की चुड़ैल हूँ…. कोई टोटका काम नहीं आएगा….. अरे ये क्या हो रहा है…. मुझे चक्कर क्यूँ आ रहे हैं……. मैं अपने साथ नहीं हूँ……

विनायक- नायिका,
अब बताओ टोटके ने काम किया न?
फोन नंबर use भले न हो पर पास में है और चाहे तो use कर सकते हैं, नहीं कर रहे ये हमारी मर्ज़ी – बहुत बड़ी तसल्ली है.

ये तीसरी बार चुड़ैल कहा, पहली बार कुछ समझाने के लिये कहा था, दूसरी बार मज़ाक में और मैंने भी इस शब्द का उपयोग कर लिया पर अब न करना, खुद को धिक्कारने लगता हूँ कि मेरे होते हुये कोई, कोई भी जो मेरे सम्पर्क में है, ऐसा कैसे सोच या महसूस कर सकता है?

खुद को ज़्यादा ही महत्व दे रहा हूँ न, अहंकारी भी लग रहा हूंगा! दोनो ही बातें सच हैं पर आधी! शेष आधा तो अन्वेषण का विषय है, फुरसत और रुचि हो तो करते रहना. बस ये शब्द इस्तमाल मत करो.

इतना घूमा हूँ, अकसर अकेले पर, आज तक कोई भी चुड़ैल नहीं मिली क्योंकि होती तो मिलती न!  कितने पीरों फकीरों, बाबाओ, तांत्रिक- मांत्रिको की संगत की, श्मशान मे घूमा हूँ आधी रातों को, न थी, न मिली.

चलें आगे, नहीं तो सारी रात श्मशान चम्पा चलती रहेगी और शिवानीजी सर धुनती रहेंगी.

(नोट : ये संवाद काल्पनिक नहीं वास्तविक नायक और नायिका के बीच उनके मिलने से पहले हुए ई-मेल का आदान प्रदान है, जिसे बिना किसी संपादन के ज्यों का त्यों रखा गया है)

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