नायिका Episode -15 : आप सामने हो तो भला क्यों कोई पलक झपकने जितना समय भी गंवायेगा?

नायिका –

अब आपकी उम्मीद कितनी बड़ी है ये तो मुझे नहीं पता ना…. ख़त तो बहुत बड़ा नहीं है, हाँ आपके गाने सुनते हुए जो महसूस किया उसे कमेंट्स में डालती गई… देख लेना…
और जाऊँ मतलब? तुम जाते ही कहाँ हो….. भूत जो हो मँडराते रहते हो आसपास…..

ऊपर से अपनी आँखें भी जड़ दी है ब्लॉग में….. जिसकी पलकें भी नहीं झपकती…

अब ज़्यादा नहीं कहूँगी…. पता चला ख़त तो नहीं मचला और मैं ही मचल गई…
– नायिका

विनायक –

ये तो मुझे भी नहीं पता कि उम्मीद कितनी बड़ी है, पर छोटी तो नहीं ही है.
भूत कौन मैं? तो पहचान ही लिया आखिर…… हो तो बरगद की चुड़ैल ही न!!
आँखें इतनी ही बुरी लग रही हैं तो हटा दूंगा……

पलक न झपकने की शिकायत तो रूबरू होने पर भी रहेगी, आप सामने हो तो भला क्यों कोई पलक झपकने जितना समय भी गंवायेगा?

पता नहीं मचल जाती तो क्या करती, मैं तो मचल गया था और फिर जब सहन नहीं कर सका तो सोचा कि उस शहर में  किसी से भी बात तो करनी ही है, ये अहसास ही राहत देने वाला लगा कि जिससे भी मैं बात करूंगा, वो और आप एक ही हवा मे सांस ले रहे है….. बात की और  फिर एक और anti-climax , मामला लम्बा है….

एक गुज़ारिश है, मुझे गाड़ी चलाने दें, नहीं तो किसी दिन accident कर बैठूंगा, अरे यहाँ से मत निकालो जगह कम है, देखो सामने वाला मुड़ रहा है, ज़रा ध्यान से! सामने गड्ढा है…….. मुझे सब दिख रहा है और बरसों से इसी शहर मे गाड़ी चला रहा हूँ मैं सब सम्भाल लूंगा बस आप ज़रा चुपचाप बैठें.

रात को छोटी बहन के घर जा रहा था कि एक crossing आई जिसमें फव्वारा चल रहा था,  शायद उसके किसी nozzle में खराबी होगी कि फुहारें आधी सड़क को भिगो रही थी, सभी लम्बा घेरा काट कर उससे बच बच कर निकल रहे थे, मुझसे हो गई गलती, पीछे सर घुमा के पूछ बैठा, भीगोगी?

सड़क के सभी लोग हैरत में पड़ गये होंगे जब उन्होंने उस ज़ोरदार बौछार में एक बाइक जाते हुये और अगले ही पल तरबतर बाइक को आते देखा होगा, एकदम सराबोर.
है न बचपना!
अभी बच्चा ही तो हूँ!!! हूँ न नायिका?

– विनायक

नायिका –

आज सुबह चक्काजाम था किसी राजनैतिक समूह का, मुझे कहाँ चैन मिलना था…… निकल गई घर से …… तुम्हारी तरह रास्ते तो याद नहीं बावजूद इसके कि यहीं पर जन्म हुआ है. बड़ी मुश्किल से गड्ढों वाली गलियों से निकलकर न जाने कहाँ आ पहुँची हूँ… ऑफिस तो नहीं पहुँच पाई…. पूरे रास्ते सबसे एक ही सवाल कर रही थी… यहाँ आसपास कोई सायबर हो तो बता दो भगवान भला करेगा आपका..

लोगों को शायद मेरी सूरत देख कर दया आ गई… कहा – बहनजी यहाँ से थोड़ी दूर ही है चले जाइए… जिसके लिए चेहरा यूँ मायूस कर रखा है उनको हमारी भी राम राम कहना….

बस आकर बैठी हूँ सायबर में….

ये बचपना कब जाएगा कोई इस उम्र में भी यूँ मचलता है क्या? अब बस भी करते हैं यार… किसी ने देख लिया ना मुझे यूँ मचलते हुए तो मेरी अच्छी खासी समझदारवाली इमेज मिट्टी में मिल जाएगी….
तुम तो करोगे नहीं चलो मैं ही रोकने की कोशिश करती हूँ ख़ुद को…..

ना, अपनी आँखें ब्लॉग से हटाने की ज़रुरत नहीं…. किसी दिन धोखा दोगे तो कोई सबूत भी तो होना चाहिए ना मेरे पास कि आँखों की गहराई को सच मान बैठी थी…

कल घर लौटते समय बारिश हो रही थी, रेनकोट था फिर भी नहीं पहना, मुझे पता था आगे जाकर Fountain में भीगना पड़ेगा..

चलो आपकी आज्ञा का पालन करते हुए पहले ब्लॉग देखती हूँ फिर आगे की कहूँगी…. आज बाहर हूँ तो ख़त बड़ा हो गया…. लेकिन मचलने नहीं दिया है उसे… है ना? कंट्रोल कर लिया ना मैंने????

विनायक –

चक्काजाम तो मैंने भी देखा, पर इस शहर की गलियों से परिचित हूँ बावजूद इसके कि यहाँ मेरा जन्म नहीं हुआ!
चलिये जाम के बहाने कई भाई तो मिले, दुबारा कभी किसी से मुलाकात हो तो मेरी भी राम राम दर्ज़ करा दीजियेगा…

मायूस चेहरा! क्यों??
कल 4 बार जागा और टाइम देखा, कभी देख कर झल्ला जाया करता था कि इतनी जल्दी सुबह हो गई, अभी तो सोया था, और कल रात…. कल रात भी झल्ला रहा था, अभी सिर्फ 2:15 ही हुआ है, अब 3:37, 4:28 और आखिरी बार फिर सोया ही नहीं 5:43 पर, सुबह जल्दी होगी तो जल्दी 1 बजेंगे.
बचपन!!! नहीं, लड़कपन!!!

धोखा खाने से डरने वालों को विश्वास ही नहीं करना चाहिये!
नहीं, आज्ञापालन का काम मेरा है…
मै क्या बताऊँ, खुद को ही रोके रखने के लिए सारी ताकत झोंक दी है…

नायिका –

रात भर जागा न करो, मुझे उठकर बार-बार देखना पड़ता है…

बस थोड़ी ताकत और लगा लो…… मुझे विश्वास है हम रोक लेंगे ख़ुद को….

ना, इतनी बार धोखा खाया है …. चलो एक बार और सही…..

विनायक –

मैं नहीं जागता, नींद खुल जाती है, कारण आज आपने बता दिया, आप बार-बार देखने जो आ जाती है…

हमारे इधर तो पूरी का मतलब पूरी ही होता है, अब और ताक़त कहाँ से लाऊँ?

लोगो को चौंकाने और ग़लत साबित करने में बड़ा मज़ा आता है…
नायिका –

देखने न आऊँ तो क्या करूँ… भूत हो कहीं मेरे बरगद के पेड़ पर डेरा जमा लिया तो मैं कहाँ जाऊँगी…..

चलो तुमसे तो होना नहीं है, मैं ही कोशिश करती हूँ अपनी heartbeats को normal करने की…..

विनायक –

Cardiologist से मिलिए, यूँ heartbeat बढ़ना वो भी इस उम्र में अच्छी बात नहीं ?

– प्रस्तुतकर्ता माँ जीवन शैफाली

(नोट : ये संवाद काल्पनिक नहीं वास्तविक नायक और नायिका के बीच उनके मिलने से पहले हुए ई-मेल का आदान प्रदान है, जिसे बिना किसी संपादन के ज्यों का त्यों रखा गया है)

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