जन्म स्मरण : वो खुद कहते थे, हिंदुस्तान में एक ही कार्टूनिस्ट है, वो है आरके लक्ष्मण

अनुभवों को शब्दों में पिरोना बहुत मुश्किल होता है. एक नहीं दो नहीं 10-12 दिनों की कार्यशाला में इतनी महान हस्ती के साथ उनके अनुभव जानने और उनकी विधा को उन्हीं से सीखने का मौका मिलना किसी वरदान से कम नहीं.

लक्ष्मण सर ने मुझे मेरी पीएचडी का विषय दिया.. उनसे जुड़ी यादों में उनके साथ संवाद में उनका हिंदी समझने से इंकार करना और मेरा हिंदी में ही सवाल पूछना याद है. मेरी टी शर्ट्स पर रोज किए जाने वाले उनके कमेंट्स याद हैं. ज्यादातर समय गुस्से में दिखने वाले चेहरे पर आने वाली तेज हंसी की कीमत भी याद है.

भोपाल की उस कार्टून वर्कशॉप के बाद उनसे कभी नहीं मिल पाया लेकिन उन्हें जितना जाना वो ये समझने के लिए काफी है कि वो क्यूं इतने महान कार्टूनिस्ट बने.

वो जिंदगी को बहुत धीरे धीरे सरकते हुए देखते थे. सड़कों पर चलते लोग, सीढ़ियों पर चढ़ते उतरते लोग, किस तरह के कपड़े लोगों ने पहने हैं, किस तरह की भाव भंगिमाएं हैं.

वे साफ कहते थे मैंने एक ही काम सीखा है वो है कार्टून बनाना. वो ये भी कहते थे हिंदुस्तान में एक ही कार्टूनिस्ट है और वो आर. के. लक्ष्मण है. और वो इस बात को बहुत SERIOUSLY कहते थे.

आप अमर हो सर… आपने सीखाया काम कोई भी हो तपस्या की तरह करो तो महान बना देता है.. उस वक्त मोबाईल में तस्वीरें खींचने का चलन नहीं था लेकिन मुझे याद है हमने कई कैमरों की मदद से ढेर सारे फोटो सर के साथ खींचे थे.

मेरे पास तो यही एक बचा है वो भी मेरी दोस्त की मदद से मिल पाया किसी भी मित्र के पास और फोटों हो तो प्लीज मुझे भेजिएगा जरूर…

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