अखिलेश ने शिवपाल यादव, गायत्री प्रजापति समेत 4 मंत्री किए बर्खास्त

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लखनऊ. उत्तरप्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी का विभाजन तय हो गया लगता है. पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के बेटे और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने मंत्रिमंडल से चाचा शिवपाल यादव समेत चार अन्‍य मंत्रियों को बर्खास्‍त कर दिया है.

बर्खास्‍तगी का यह फैसला अखिलेश यादव द्वारा रविवार को बुलाई गई बैठक के बाद लिया गया. बैठक के बाद राज्‍यपाल को मंत्रियों की बर्खास्‍तगी की सूचना दी गई है.

जो मंत्री बर्खास्‍त हुए हैं उनमें शिवपाल यादव के अलावा शादाब फातिमा, मंत्री नारद राय, मंत्री ओमप्रकाश और गायत्री प्रजापति शामिल हैं.

इन सब के अलावा सूचना है कि अमर सिंह की समर्थक रहीं जया प्रदा को भी फिल्‍म विकास परिषद से हटाने का फैसला लिया गया है.

इससे पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधायकों की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष व विधायक शिवपाल यादव समेत तकरीबन तीन दर्जन विधायकों व कई मंत्रियों को आमंत्रित नहीं किया.

जिन्हें आमंत्रित नहीं किया गया है, उन्हें शिवपाल यादव का करीबी माना जाता है. इस पर शिवपाल ने कहा कि उन्‍हें बुलाया नहीं गया और इसके चलते वो शामिल नहीं हो रहे हैं.

इतना ही नहीं, अखिलेश ने खुद को मुलायम सिंह का एकमात्र उत्तराधिकारी बताते हुए कहा कि जो भी अमर सिंह के साथ होंगे उन सभी को बाहर किया जाएगा.

अखिलेश यादव के इस फैसले के तुरंत बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और बर्खास्त मंत्री शिवपाल यादव अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव से मिलने पहुंचे हैं.

हालांकि अखिलेश ने कहा कि मेरा पार्टी तोड़ने का कोई इरादा नहीं है. मुलायम सिंह मेरे नेता होने के साथ ही मेरे पिता भी हैं और मैं उनसे अलग नहीं हो सकता. मैं उनका उत्‍तराधिकारी हूं.

अखिलेश ने सीधे तौर पर अमर सिंह पर हमला बोलते हुए कहा कि सारी आग अमर सिंह ने लगाई है. उनके सभी समर्थकों के खिलाफ कार्रवई होगी. सूत्रों के अनुसार अखिलेश ने अमर सिंह को दलाल भी कहा.

वहीं दूसरी तरफ खबर है कि अखिलेश यादव के समर्थन में चिट्ठी लिखने वाले पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव को लेकर पार्टी कोई बड़ा फैसला कर सकती है.

समझा जा रहा है कि मुलायम सिंह यादव और शिवपाल की मुलाकात के बाद उन्‍हें पार्टी से बर्खास्‍त किया जा सकता है.

इससे पहले पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने सपा कार्यकर्ताओं के नाम पर एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें कहा गया था, अखिलेश का विरोध करने वाले विधानसभा का मुंह नहीं देख पाएंगे.

रामगोपाल ने कहा, जहां अखिलेश वहां विजय. रथयात्रा विरोधियों के गले की फांस है. इस फांस को और तेज करने की जरूरत है.

उल्लेखनीय है कि मुलायम के कुनबे में ये झगड़ा चार महीने से चल रहा है. शुरुआत जून में उस वक्त हुई जब शिवपाल ने सपा में दागी मुख्तार अंसारी की पार्टी के विलय की कोशिश की.

अंसारी के कौमी एकता दल के सपा में विलय पर अखिलेश राजी नहीं थे. लेकिन शिवपाल यादव ने विलय करा लिया था.

इसके बाद दागी मंत्री गायत्री प्रजापति को कैबिनेट से हटाया गया. विवाद में अमर सिंह की भूमिका सामने आई. बाद में मुलायम के कहने पर अखिलेश को उन्हें दोबारा बहाल करना पड़ा.

कैबिनेट फेरबदल करते अखिलेश ने शिवपाल से अहम विभाग छीन लिए थे, तब मुलायम ने अखिलेश को सपा प्रदेश अधुँक्ष के पद से हटा दिया था. इसके बाद एक बार फिर अखिलेश को झुकाते हुए मुलायम के कहने पर शिवपाल को विभाग लौटाने पड़े थे.

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