परमाणु शक्ति संपन्न देश पाकिस्तान का कबाड़ एयर फॉर्स

Pakistani Air Force (PAF) आज कल Jordan से second hand F-16 (block-30, made in year 1988-90, upgraded in 2001-2002) खरीदने के ऑप्शन को seriously consider कर रहा है.

जी हाँ. ये सच है PAF की हालत बहुत ही खस्ता है. पुराने पड़ चुके F-16 ( block-15, 80s के दशक का) को निकालने के लिये अमेरिका से 8 नये F-16 लेने वाला था (इसके लिये भी अमेरिका ही अनुदान देने वाला था ).

पर ऐन वक्त पे U.S. Congress ने अमेरिकी सरकार के foreign miliatry financing programme को ब्लॉक कर दिया जिससे पकिस्तान को मिलने वाले miliatry aid का रास्ता बँद हो गया.

अब पकिस्तान के पास विमान खरीदने के लिये 700million $ हैं नही (लगभग 4550 crore). ऐसी हालत में 2nd hand विमानों से बेहतर क्या हो सकता है. PAF में 2nd hand विमानों का एक लम्बा इतिहास रहा है.

2014 में भी पकिस्तान ने कबाड़ में पड़े jordan air फोर्स के 12 विमान (F16) खरीदे थे. पर आज के दिन में ऐसा कबाड़ भी खरीदने के लिये अमेरिका की अनुमति चहिये होगी जो कि मिलना मुश्किल लग रहा है.

खुद पकिस्तान के Defence ministry के एक अधिकारी rear admiral Mukhtar khan के शब्दों मे “American approval is a mandatory requirement and in present situation, it is not an easy game to manage “.

ऐसा बिल्कुल न सोचें कि पकिस्तान सिर्फ पुराने f16 ही उड़ा रहा है. पकिस्तान को पुराने french mirage-llls उड़ाने में भी महारत हासिल है.

पाकिस्तानी सरकार ने 1992 में 50 mirage विमान ऑस्ट्रेलिया से खरीदे जिनकी कुल कीमत 180 crore थे (जबकि एक rafale की कीमत करीब 1640 crore है ) ये विमान 4000 घंटे की उड़ान पूरी कर चुके थे. मतलब ये कि सचे मायने मे ये कबाड़ ही था.

Pakistan air force मे fighter jets के नाम पे mirage- llls ,Vs, Chengdu F-7s , jf -17 और F-16 हैं. यहाँ ये भी जान लें कि jf-17 पकिस्तान और china ने मिल के बनाया है जिनकी performance और quality शक में है. रही बात f-16 की तो अमेरिका ने ये terrorist से लड़ने के नाम पे दिया था. इनकी क्षमता IAF के साथ लड़ने के लिहाज से काफी कम है.

Pakistan Air Force जिस भी दिन भारतीय वायु सेना के सामने आयेगा उसकी युद्ध लड़ने की सारी हसरतें हमेशा के लिये ख़त्म हो जायेंगी.

आज के दिन भारतीय वायु सेना में लगभग 700 लड़ाकू विमान हैं जिनमे से 400 विमान twin engine (दो एंजिन्स वाला भारी विमान ) है जबकि पकिस्तान के 359 लड़ाकू विमानों में से एक भी twin engine नही है.

कारण ? twin engine विमान न सिर्फ महँगे हैं बल्कि इनको operate करने में भी बहूत खर्च आता है. दो engine के कारण इनका रख-रखाव, मरम्मत और ईंधन बहुत अधिक लगता है. एक दर्जन sukhoi -30 विमानों को एक दिन उड़ाने के लिये लगने वाले fuel की कीमत लाहौर जैसे शहर को बिजली की कुल खर्चे के बराबर है.

यानी अगर पकिस्तान को free of cost , su-30 दे दिये जायें तो उनको उड़ाने के लिये fuel का जुगाड़ भी नहीं कर सकता जबकि भारत ऐसे 300 विमान (लगभग ) रखता है. तो जो लोग ये सोच रहे हैं कि पाकिस्तान russia से विमान खरीद सकता है वो इस बात को ठीक से समझ लें कि पकिस्तान ना युरोप, ना अमेरिका और ना ही russia से विमान खरीदने की क्षमता रखता है.

(पकिस्तान के F -16 भारतीय su30 और rafale के सामने कहीँ नही ठहरने वाले. Indian Air Force की एक मात्र चुनौती china ही है. इसकी चर्चा अगले लेख में.)

धन्यवाद

– सुधांशु रंजन

(Pic- Pakistani mirage-lll, junk)

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