विलक्षण मानव शरीर : एहे घट अंदर सात समंदर एहे में लगा बजारा

एक मिनट में एक नवजात शिशु 60 बार सांस लेता है जबकि एक किशोर 20 बार और एक युवा केवल सोलह बार एक मिनट में सांस लेता है.

शिशु के शरीर में 300 हड्डियाँ होती है, वयस्क हो जाने पर शरीर में केवल 206 हड्डियाँ रह जाती है. जबड़े की हड्डी सबसे मजबूत होती है, वह लगभग 280 किलो वजन भी सहन कर सकती है.

एक स्वस्थ युवा शरीर का मस्तिष्क 20 Watt विद्युत पैदा कर सकता है. मस्तिष्क को प्राप्त होने वाले सभी सन्देश भी विद्युत धारा के रूप में ही तंत्रिकाओं को मिलते हैं. सन्देश लाने और ले जाने की दौहरी व्यवस्था के लिये शरीर में 20 हजार फुट नसों का जाल बिछा है. मस्तिष्क में दस अरब न्यूरॉन कोशिकाएं होती है और मस्तिष्क का वजन सिर्फ डेढ़ किलो होता है.

शरीर से प्राप्त लोहे से एक इंच की कील तैयार की जा सकती है. जब शरीर को पूरा आक्सीजन नहीं मिलता तो जम्हाई ले कर शरीर आक्सीजन की कमी पूरी करता है.

शरीर में 64 प्रतिशत जल, 16 प्रतिशत प्रोटीन, 14 प्रतिशत चर्बी, 5 प्रतिशत लवण और 1 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है. मानव शरीर खनिज पदार्थों की एक समग्र खान है.

जब कोई मनुष्य छींकता है तो बाहर निकलने वाली हवा का वेग 160 किलोमीटर प्रति घंटा होता है.

नवजात शिशु जब रोता है तो उसके आंसू नहीं आते क्योंकि तब तक उसकी अश्रुग्रंथियाँ विकसित नहीं होती है. हमें हँसने के लिए 17 स्नायुओं का प्रयोग करना पड़ता है जबकि रोने के लिए 43 स्नायु काम में लेने पड़ते हैं.

इसलिए सदा हँसते रहिए , खुश रहिए ! मनुष्य अपनी चेतना की सामर्थ्य को बढ़ाकर और कुछ भी पा सकता है. मानव शरीर विलक्षण है.

  • डॉ एस के सिंह

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