महाराणा प्रताप का गधा

एक बालटी खौलते पानी के साथ अगर बर्फ का एक क्यूब रख दिया जाए तो वो खौलता पानी उसे पिघला देगा और अगर बर्फ की सिल्ली के बगल में एक कप चाय रख दी जाए तो वो बर्फ की सिल्ली उस चाय को ठंडा कर जमा देगी.

इस साधारण सी बात को समझने के लिए किसी रॉकेट साइंस या nuclear physics में पीएचडी होना ज़रूरी नहीं है.

अलबत्ता यदि किसी साइंस दां से यह कह दिया जाए कि सिद्ध करो कि यह गधा दरअसल एक अरबी घोड़ा है तो उसके लिए बड़ा मुश्किल काम होगा.

हाँ यही काम कोई मीडिया हाउस, राजनेता या कॉर्पोरेट हाउस आसानी से चुटकियों में कर सकते हैं.

अब अपने दिग्गी राजा को ही ले लीजिये. पिछले तीस चालीस साल से राजनीति में हैं. दस साल तक मध्य प्रदेश जैसे विशाल और जटिल राज्य के मुख्यमंत्री रहे.

सारी दुनिया जानती है कि पिछले दस साल से, जब से मध्य प्रदेश का चुनाव हारे हैं, अपनी सभी राजनैतिक कारगुजारियों से स्व घोषित संन्यास ले कर अपने राहुल बाबा को पढ़ा लिखा रहे हैं. अपने बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में बने रहते हैं.

अब देखिये, ये कोई छिपी हुई बात तो है नहीं कि अपने युवराज एकदम बकलोल हैं. भारत देश जो कि अपने को विश्व भर का महागुरु कहते नहीं अघाता…. जहां इतना wisdom है…. पूरा मुल्क मानता है कि युवराज बकलोल हैं.

तरह तरह के नाम दे दिए हैं लोगों ने….कोई पप्पू कहता है तो कोई dumbo…. हालांकि उन्हें दिग्गी राजा जैसे घाघ आदमी की संगति में अब तक बहुत कुछ सीख लेना चाहिए था.

वो तो कुछ सीख नहीं पाए, उलटे अपने दिग्गी राजा उनकी संगति में रह के एक नंबर के बकलोल आदमी हो गए हैं….

इसमें मुझे physics का ऊपर वर्णित सिद्धांत कार्य करता दीखता है. अर्थात राहुल गांधी की मूर्खता, हिमालय के समान इतनी विशाल थी कि उनकी संगति में रह के दिग्गी राजा की बुद्धि और समझदारी घास चरने चली गयी और वो भी राहुल बाबा की तरह पप्पू हो गए.

अन्यथा कोई समझदार आदमी तो इस तरह का बयान नहीं ही दे सकता कि बोधगया के धमाकों में मोदी का हाथ हो सकता है.

वैसे इसमें एक अन्य कारण भी हो सकता है. दिग्गी राजा और अन्य कांग्रेसी नेताओं के नाज़ुक कन्धों पर ये महती जिम्मेदारी है कि किसी तरह इस गधे को घोड़ा सिद्ध करो.

अब देखो भैया, जिन लोगों ने घोड़े दौडाए हैं और गधे चराए है, वो सब जानते समझते हैं, पर अँधेरे में भ्रम तो पैदा कर ही सकते हैं.

इसलिए गधे को हमेशा रात में बाहर निकालो. उसे सबके सामने बोलने (रेंकने) मत दो. उसे घोड़ो के साथ मत दौड़ाओ. धोबियों से कह दो उसपे कपड़ों का गट्ठर न लादें.

उसे हमेश टेबल पर खडा करो जिससे कि वो ऊंचा दिखे. गधे से कह दो कि वो ज़मीन पर लोटना बंद कर दे.

बड़े घरों के रईस दूल्हों की शादियों में वो बरात में जाए और सब लोग उसके आगे डांस करें. इस प्रकार नाना विधि प्रयास कर गधे को घोड़ा बनाया जा सकता है.

कुछ अन्य तरीके भी आजमाए जा सकते है. यथा एक रेस कराई जाए जिसमे सभी घोड़ों से कह दिया जाए कि वो गधे से पीछे रहें. अखबारों में गधे का फोटू घोड़े जैसा छपे (फोटो शॉप).

बुरखा धुत्त और खाजदीप, बड़े बड़े एक्सपर्ट्स को अपने चैनल पर बुला कर ये सिद्ध कर दें कि ये (गधा) ही असली घोडा है और जो ये घोड़े बने घूम रहे हैं वो दरअसल ऊँट की एक प्रजाति हैं.

Animal husbandry वाले डिपार्टमेंट में घोड़े और गधे की specifications भी बदली जा सकती हैं. या सीधे सीधे घोड़े की फाइल ही गायब करा दी जाए.

स्कूल के पाठ्यक्रम में NCERT की नयी पुस्तक छपवा के उसमें लेख घोड़े पर लिखवाओ पर फोटो गधे का छाप दो… जिससे नयी पीढी यही पढ़े-समझे कि घोडा इसी शक्लो सूरत और रंग ढंग का होता है.

देश भर में महाराणा प्रताप की नयी मूर्तियाँ बनवाओ जिसमें वो गधे पे सवार दो मन का भाला लिए, जिरह बख्तर पहने अकबर से युद्ध कर रहे हैं.

नयी कविता लिखवाओ श्याम नारायण पाण्डेय से…. राणा प्रताप के गदहे से, पड़ गया हवा का पाला था .

कुछ अन्य उपाय भी हैं. गधे की समस्या ये है कि गाँव में कुछ घोड़े भी हैं…. यदि ये साले घोड़े न होते तो गधा मज़े से राग दरबारी सुनता और भीम पलासी गाता…. और गाँव की फसल चरता ठाठ से…. उसे कौन कहने वाला होता कि अबे साले तू गधा है….

सो कांग्रेस ने अपने गाँव से तो सभी घोड़ों को निष्कासित, निर्वासित और निलंबित कर दिया है. कांग्रेस में घोड़ों का प्रवेश वर्जित है. एक आध घोड़ा अगर कोई छूटा छटका बचा है तो वो बेचारा कपड़ों का गट्ठर लादे निहुर के चलता है.

पर कमबख्त बगल के गाँव में साला एक घोडा है अभी. काठियावाड़ी नस्ल का. कुलांचे भरता है. सरपट दौड़ता है तो दुनिया अश अश करती है.

ज़रा सी एड़ लगते ही पिछले पावों पे खड़ा हो जाता है.उसके नथुनों से आग निकलती है.उसका क्या करें?

अगले साल जब मेला लगेगा तब गधे को उसके साथ दौड़ लगानी ही पड़ेगी…. कुछ लोग सरकार को ये सलाह दे रहे हैं कि सीबीआई जांच करवा के बंद करवा दो साले को.

या सभी घोड़ो का sample ही फेल करवा दो. सभी घोड़ो का दौड़ने का लाइसेंस ही जब्त कर लो. अमेरिका और इंग्लॅण्ड से कहलवा दो कि घोड़े परदूसन फैलाते हैं . गाँव में खबर फैला दो की बच के रहना भैया….घोडा नहीं शेर है…. खा जाएगा…..

दिग्गी राजा कब से हैरान परेशान हैं. हिनहिनाना सिखा रहे हैं. पर कमबख्त दो लाइन हिनहिनाता है फिर रेंकने लगता है…. भरी महफ़िल में जमीन पे लोटने लगता है…. इस चक्कर में दिग्गी राजा खुद हिनहिनाना भूल कर जब-तब रेंकने लगते हैं

(साल 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले का लेख)

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