सिर का ख़याल रखता है सिरका : डैंड्रफ से छुटकारा दिलाए, बाल चमकाए

भारतीय व्यंजनों में सिरका या खमीर अक्सर दूध से या आचार से जोड़कर ही देखा जाता है. इससे परे विश्व की अनेक भोजन पद्धतियों में सिरके की भूमिका कुछ ज़्यादा देखी जाती है.

इन भोजन पद्धतियों में सिरका केवल स्वाद का माध्यम नहीं बल्कि भोजन की पौष्टिकता बढ़ाने और लोगों को सेहतमंद रखने हेतु इस्तेमाल किया जा रहा है.

आयुर्वेद में सिरके का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है. आप अपने बालों को सुंदर बनाने के लिए भी सिरके का प्रयोग कर सकते हैं. सिरका बालों के लिए अच्छा है.

डेंड्रफ और जूं जैसी समस्याओं से बचने के लिए सिरके का प्रयोग लाभकारी है. बालों की अच्छी तरह से सफाई और बालों को स्वस्थ रखने में सिरके का इस्तेमाल किया जाता है. बालों की कंडीशनिंग के लिए भी सिरके का इस्तेमाल किया जा सकता है.

सिर में होने वाले फुंसी, फंगस और इसी तरह की अन्य समस्याओं को दूर करने और बैक्टीरिया इत्यादि को नष्ट करने में भी सिरके का प्रयोग किया जाता है.

बालों की चमक बरकरार रखने के लिए और बालों को मुलायम और सुंदर बनाने के लिए सिरके से किफायती कुछ भी नहीं.

सिरके से बालों को सीधा भी किया जा सकता है. यदि रूखे और घुंघराले बालों को सीधा करना है तो सिरके का प्रयोग करना चाहिए. ऐसे में आपको चाहिए कि आप सेब के सिरके से बालों को धोएं और इससे जल्द ही आप बाल सीधे कर पाएंगे.

भोजन के साथ सिरका खाने से रक्त पतला होता है.

सिरका चर्बी कम करने और शरीर से विषैले पदार्थ निकालने की प्रक्रिया में सहायक होता है तथा इससे रक्त से वसा और हानिकारक कोलिस्ट्रोल कम होता है.

सिरका बुद्धि में तीव्रता का कारण बनता है और ह्रदय के लिए लाभदायक होता है.

सिरके में मौजूद साइट्रिक एसिड आहार में मौजूद कैल्शियम को शरीर का अंश बनाता है और शरीर की आंतरिक क्रियाओं के लिए अत्याधिक लाभदायक होता है.

सिरका पाचनक्रिया के लिए हानिकारिक बैक्टिरिया का नाश करता है. जिन लोगों को पाचनतंत्र की समस्या और क़ब्ज़ तथा दस्त अथवा पेट दर्द में ग्रस्त हैं, वह सिरके की सहायता से इन समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं.

सिरके का एक अन्य लाभ यह है कि वह अमाशय की एसिड के स्राव को संतुलित करता है .

सिरका दांतों की गंदगी दूर करने और मसूड़े की सूजन में लाभदायक है.

कमज़ोर स्नायुतंत्र, गठिया और अल्सर के रोगियों के लिए सिरके का प्रयोग हानिकारक हो सकता है .

जामुन का सिरका पेट सम्बंधी रोगों के लिए लाभकारक है. जामुन के सिरके से भूख बढ़ती है, पेट की वायु निकलती है, कब्ज दूर होती है व मूत्र साफ होता है.

काले पके हुए जामुन साफ धोकर मिटटी के बर्तन में नमक मिलाकर साफ कपडे से बांध कर धूप में रख दें. एक सप्ताह धूप में रखने के पश्चात् इसको साफ कपड़े से छान कर रस को कांच के बोतल में भर कर रख दें.

यह सिरका तैयार है. मूली, प्याज, गाजर, शलजम, मिर्च आदि के टुकड़े भी उसी सिरके में डालकर इसका उपयोग सलाद पर आसानी से किया जा सकता है.

अगर किसी ने धतूरा खा लिया हो, तो उसे अंगूर का सिरका दूध में मिलाकर पिलाने से काफी लाभ होता है.

एक प्याले में सेब का सिरका, एक कप शहद और छिले हुए लहसुन की आठ कली मिलाओ. इन सबको तेज चलने वाली मिक्सी में डाल कर एक मिनट के लिए चला दो और घोल तैयार करो.

इस मिश्रण को एक काँच की बोतल में डाल कर पाँच दिन के लिए फ्रिज में बन्द करके रखो. दो चम्मच पानी या अंगूर या फलों के रस में डाल कर नाश्ते से पहले लो.

इस इलाज से बंद नाड़ियों, जोड़ों का दर्द, उच्च रक्तचाप ( हाई ब्लड प्रैशर), कैंसर की कुछ किस्मों, कोलेस्टरोल की अधिक मात्रा, सर्दी ज़ुकाम, बदहज़मी, सिर दर्द, दिल के रोग, रक्त प्रवाह की समस्या, बवासीर, बांझपन, नपुसंकता, दांत दर्द, मोटापा, अल्सर और बहुत सारी बीमारियाँ ठीक करने में सहायता मिलती है.

एसीडिटी से निजात पाने के लिए एक गिलास पानी में दो चम्मच सेब का सिरका तथा दो चम्मच शहद मिलाकर खाने से पहले सेवन करें.

– आचार्य बालकृष्ण महाराज

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