मांसाहार नहीं छोड़ा तो शाकाहारी भी नहीं रह पाओगे, बनना पड़ेगा वेगन

आप जानते हैं “वेगन” क्या होते हैं?

सामान्यत: दुनिया में दो तरह के लोग माने जाते हैं. शाकाहारी और मांसाहारी. कुछ लोगों ने एक तीसरा प्रकार भी घड़ लिया है अंडाहारी. वेजिटेरियन, नॉन वेजिटेरियन और ऐगीटेरियन. हालाँकि मैं दो ही मानता हूँ.

एक प्रकार के लोग और हैं जिन्हे वेगन कहते हैं. ये लोग पशु से सम्बंधित कोई पदार्थ नहीं खाते जैसे दूध, दही, शहद, मांस, मछली, अंडा आदि.

वेगंस के अनुसार इस दुनिया में पशुपालन अर्थात किसी भी प्रकार का पशुपालन वो चाहे मांस के लिए हो, दूध के लिए हो या श्रम के लिए पूरी तरह समाप्त कर देना चाहिए. मानव जाति के लिए इसका कोई उपयोग आवश्यक नहीं है उल्टा हानिकारक है.

दुनिया का वेगन होना अभी एक कल्पना मात्र है किन्तु इसके समर्थकों का कहना है कि प्राकृतिक परिस्थितियां एक दिन इंसान को वेगन बनने पर मजबूर कर देंगी.

(1) ऑक्सीजन का हनन और कार्बनडाइऑक्साइड का भारी मात्रा में उत्सर्जन पालतू पशुओं से होता है.

(2) एक किलो मांस उत्पादन के लिए 40000 लीटर पानी खर्च करना पड़ता है.

(3) जमीन के नीचे के पानी में और नदियों के प्रदूषण में पालतू जानवरों के मल, मूत्र और कट्टी घरों से निकलने वाले मांस के लोथड़े, खून भयानक भूमिका अदा कर रहे हैं.

(4) पालतू पशुओं को जितना अनाज खिलाया जाता है उससे पशुमांस के अपेक्षा 40 गुना अधिक व्यक्तियों का पेट भरा जा सकता है.

(5) पशु कटान से मानव में अंदर हिंसा की प्रवृति का उदय होता है.

(6) और अब दुनिया भर में साबित हो चुका है कि बड़ी बीमारियों जैसे कैंसर, हार्ट अटैक और डायबिटीज में मांसाहार का बड़ा योगदान है. शाकाहार में मनुष्य को स्वस्थ रखने की ज्यादा क्षमता है.

– रवींद्र कान्त त्यागी

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