बंगाल : आइए प्रारंभ करें आक्रोश को जनाक्रोश में बदलने का पुनीत कार्य

यह प्रश्न हर किसी राष्ट्रवादी को झकझोर रहा होगा कि आखिर बंगाल के हालात पर केंद्र सरकार क्या कर सकती है?

चूँकि कानून – व्यवस्था, राज्य का विषय है यही सोचकर हम में से अधिकांश गुस्से में कह देते हैं , “भुगतो बंगाल वासियों, अपने कर्मों की सजा भोगो ..”

यदि घर का कोई सदस्य पागल हो जाय तो क्या उसे सडक पर छोड़ देना चाहिए? नहीं …तो यहाँ हमारा उत्तरदायित्व है कि बंगाल को सुधारने का प्रयास करें.

आज बंगाली हिन्दुओं को इस चक्रव्यूह से बाहर निकलने के लिए वृहद हिन्दू समाज से अपार सहयोग की अपेक्षा है.

केंद्र सरकार चाहे तो कड़ी कार्यवाई कर सकती है, गृह मंत्रालय, राज्यपाल चाहें तो भूचाल ला सकते हैं.

केंद्र सरकार कठोर कदम तभी उठा सकती है जब जन आक्रोश चरम पर हो… मीडिया इस विषय पर आग उगले. अन्यथा विरोधी किसी भी कदम को राजनीति से प्रेरित बताकर पलीता लगाने में माहिर हैं.

इस परिस्थिति निर्माण के लिए हिन्दुओं को भूचाल खड़ा करना होगा. हर स्तर पर भूचाल खड़ा करना होगा, सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक ..बिलकुल वैसे ही जैसे उड़ी हमले के ठीक बाद किया गया था.

जब कई शहरों में इस घटना के प्रतिक्रिया स्वरुप बंद, जनसभा, कैंडल मार्च आदि का आयोजन होने लगेगा… सोशल मीडिया की हर दूसरी पोस्ट बंगाल पर होगी… तब ममता सरकार घुटने टेक देगी.

यदि ममता बनर्जी जिद्द पर अड़ती हैं तो उस परिस्थिति में केंद्र सरकार भी 356 का प्रयोग कर सकती है.

आइये एक अच्छे पडोसी की भूमिका निभाते हुए, बंगाली हिन्दुओं को कोसने के बजाय अपने आक्रोश को जनाक्रोश में बदलने का पुनीत कार्य प्रारंभ करें.

जनार्दन पाण्डेय ‘प्रचण्ड’

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