मोदी सरकार की नई नीति : न खुद खाएंगे, और न ही भविष्य में कोई खा पाएगा

ये मोदी जी भ्रष्टाचार तो करते नहीं हैं और ऐसा इंतजाम कर रहे हैं कि आने वाली सरकारे भी भ्रष्टाचार न कर पाएं. भ्रष्टाचार कैसे होता है, बड़े औद्योगिक घरानों को कैसे फायदा पहुंचाया जाता है ये सब सरकारी नीतियों में छुपा होता है.

पहले महान मनमोहन सिंह जी की सरकार थी. मनमोहन जी ईमानदारी की प्रतिमा बनकर राज करते थे एकदम पुतले के माफिक. उस समय भारत की जमीन को खनिज की खोज के लिए एक्सप्लोरेशन के लिए दिया जाता था. ऑक्शन हुआ और कुछ कंपनियों ने जमीन के पट्टे ले लिए की हम इसमें मिनरल्स खोजेंगे.

यहाँ तक तो सही था. खेल इसके बाद शुरू होता था. चूँकि खोजने के लिए जमीन तो कम कीमत पर मिल जाती थी. लेकिन जब मिनरल्स अगर कोई मिल जाते थे तब वही जमीन बेशकीमती हो जाती थी. मिनरल्स जैसे तेल, लोहा, बॉक्साइट …

खनिज मिल जाने के बाद कांग्रेस सरकार उसी जमीन को मिनरल्स खोजने वाली कंपनी को दे देती थी. फर्स्ट कम फर्स्ट सर्व वाली पॉलिसी याद होगी आपको. कोयला स्कैम भी याद होगा.

मोदी सरकार ने अपनी माइनिंग पॉलिसी में इस नीति को बदल दिया. सबसे पहले जमीन को एक्सप्लोर करने के लिए जो पट्टे दिए जायेंगे उनमे से 80% सरकारी कम्पनियाँ होंगी. और शेष 20% प्राइवेट कंपनियों को.

और अगर मिनरल्स मिलते हैं तो उस जमीन का ऑक्शन होगा. जिसकी बोली ज्यादा उसे मिनरल्स निकालने का कांट्रेक्ट मिलेगा.

दोनों काम अलग, ढूंढने का अलग, निकालने का अलग. कंपीटिशन निश्चित करेगा कि बेईमानी न हो जमीन के दाम कम न मिले.

मोदी सरकार ईमानदार सरकार, जो लोग कहते हैं कि अम्बानी अडानी की सरकार है वो दरअसल कांग्रेस के एजेंट हैं. उसकी गन्दगी साफ़ कर रहे हैं. लोगों के दिमाग से ये मिटा देना चाहते हैं कि कांग्रेस ने कैसे दोनों हाथो से देश को लुटाया था.

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