ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेज़ : अप्राकृतिक होती आधुनिकता

अगर कोई महिला किसी दूसरी महिला से या कोई पुरुष किसी दूसरे पुरुष से शादी करता है या आजीवन साथ रहने का निर्णय लेता है तो बच्चे पैदा होंगे क्या? नहीं ना?? लेकिन इससे सबसे पहला झटका तो आपको यह लगेगा कि आपके बच्चों ने आपके धर्म, संस्कार और मर्यादाओं को तिलांजलि दे दी.

दूसरा नुकसान यह होगा कि आपकी वंशवृद्धि अवरुद्ध हो जायेगी … अर्थात आपका नाम लेने वाला या आपके घर में दिया जलाने वाला भी नहीं बचेगा. तीसरा नुकसान देश का होगा कि जिन देशों में समलैंगिकता या होमोसैक्सुएलिटी को संवैधानिक मान्यता नहीं है वहां “समलैंगिकों के अधिकार” के लिए आंदोलन होंगे.

आप कहेंगे कि क्या फर्क पड़ता है यार, 21वीं सदी में भी रूढ़िवादी क्यों बने रहें जबकि अमरीका, फ़्रांस, जर्मनी वगैरह सब तरक्की कर गए.  हमहूँ के आधनिक होवे के चाहि ….. तो भैया ये पूंजीपति जिन्होंने “टेस्ट ट्यूब बेबी” को विकसित किया, ये यही तो चाह रहे हैं. नारी को पीड़ा से मुक्ति के बहाने अप्राकृतिक आधुनिकता थोपना.

यानि आपकी सोच बिलकुल सही दिशा में है, आपके समर्थन में खड़े होने के लिए किराए के लोग खड़े किये जायेंगे ताकि आपको लगे कि आप अकेले नहीं हैं, ताकि कोई आपको पागल न कहे कि ससुरे तुझे अकेले को ही परेशानी है … इस तरह बनते हैं मुद्दे!

मतलब बिजनेस करने वाले और देश तोड़ने वाले संगठन मिलकर आपकी बुद्धि हरण करके कैसे आपकी अनैतिकता को सही साबित करते हैं और अपना उल्लू सीधा करते हैं, ये एक उदाहरण है.

फिर से याद दिलाना चाहता हूँ कि नशे की ओर जाते युवा, आतंकी/नक्सली/माओवादी या सुपारी किलर बनते बेरोजगार युवा, प्रगतिशीलता और आधुनिकता के नाम पर स्वच्छंदता, फ्री सेक्स की तरफ बढ़ती कन्याएं …. इन सबके पीछे बहुत बड़े बड़े नेटवर्क हैं और एक आप हैं कि सोशल मीडिया पर इनकी पोस्ट पढ़कर भावुक हो जाते हैं.

बड़े दयालु हैं आप …. शिकारी का जाल फैलाना भी आपकी समझ में नहीं आता.

कब जागोगे? बर्बादी के बाद??

– प्रकाश वीर शर्मा

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