लड़की कब सीखोगी तुम मौसम की समझ और पुरुष का मिजाज़

भीग रही है लड़की बरसात में
गुनगुनाते हुए मेघदूत के श्लोक

धरती सी महक रही हैं इच्छाएं
वह समेट लेना चाहती है
सारी शीतलता और जल का स्पर्श

किसी रंगीन चिड़िया सी
नाचती है मुग्धा नायिका
उसकी पंखों में लिपटे हैं
सतरंगी सपने
मेघ मल्हार के साथ
लड़की बज रही है जलतरंग-सी

लड़की तुम भीगना अशोक लता-सी
लड़की तुम महकना रात्रि-चम्पा-सी
लड़की तुम चहकना सौन चिड़िया-सी
दुपट्टे में लपेटे हुए इंद्रधनुष

लड़की, तुम्हारी प्रतीक्षा
कर रहा है कोई पुरुष
जिसे तुम समझती हो
सपनों का राजकुमार

उसके शब्द गूँज रहे हैं
तुम्हारे कानों में
वह अक्सर आता है
तुम्हारे सपनों में
जिसके स्पर्श से तुम
लरज जाती हो धरती-सी

लड़की, पुरुषों के संसार में
मुश्किल से प्रवेश करती है बरसात
भूले भटके गाती है कोई चिड़िया
यदा कदा महकती है माधवी लता

उस मजबूत पिंजरे में
अक्सर उड़ना भूल जाती है चिड़िया
चारों तरफ तपता है रेगिस्तान

लड़की कब सीखोगी तुम
मौसम की समझ
और पुरुष का मिजाज़

बरसात तो आती रहेगी हर साल!

राजेश्वर वशिष्ठ

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