लघु कथा : एक सन्देश जो छूट जाता है पीछे

बेटा अपने बूढ़े बाप को एक दिन रात्रि-भोज के लिए एक बढ़िया रेस्तरां में ले गया. खाना खाते समय बूढ़े बाप की अति कमज़ोर उँगलियों से कुछ खाना सरक कर उनकी शर्ट और पतलून पर गिर गया.

रेस्तरां में बैठे कई लोगों ने जिनमें युवा अधिक थे, हिकारत-भरी नजरों से दोनों को देखने लगे. खाना समाप्त करने के बाद बेटा पिताजी को वाशरूम ले गया और उनके मुंह, शर्ट, पैंट आदि की सफाई कर, बिल का भुगतान कर रेस्तरां से निकलने को हुआ.

रेस्तरां में बैठे सभी लोग यह सब कौतूहल से देखते रहे. तभी एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति अपनी कुर्सी से खड़ा हुआ और बेटे की पीठ थपथपाकर कहने लगा: ‘तुम कोई चीज़ पीछे छोड़कर आये हो.’

बेटे ने कहा: ‘नहीं तो’.

इस पर अधेड़ ने जवाब दिया:
‘तुम्हें नहीं मालूम. तुम बुजर्गों के लिए आशा और युवा-पीढ़ी के लिए शिक्षा-उपदेश का एक सन्देश छोड़ गये हो.’

सारे रेस्तरां में जैसे सन्नाटा छा गया!

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