मुहर्रम के बाद से साम्प्रदायिक हिंसा में सुलग रहा बंगाल, कई पुलिसकर्मी घायल

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चित्र साभार : www.hindupost.in

खड़गपुर/ पानागढ़. मुहर्रम के मौके पर बंगाल के कई हिस्सों में साम्प्रदायिक हिंसा भड़क उठी है. देर से मिले समाचार के मुताबिक़ राज्य के खड़गपुर के अलावा पानागढ़ के सिलामापुर में भी ज़बरदस्त हिंसा हुई.

इसके अलावा बंगाल के कम से कम दस अन्य स्थानों से भी साम्प्रदायिक हिंसा की खबर है. इनमें मुर्शिदाबाद जिले के जलांगी थाना का तलतली गांव, हावड़ा जिले के संक्राली थाना का अंदुल अरगोरी गांव, हावड़ा जिले के संक्राली थाना का ही मानिकपुर बेलताला गांव, हुगली जिले में चन्दननगर उर्दिबाज़ार और तेलेनीपारा, उत्तरी 24 परगना जिले में नैहाटी के पास हाजीनगर, पूर्व मेदिनीपुर जिले के भगवानपुर थाना के कलाबेरिया गाँव, वर्धमान जिले के कटवा थानान्तर्गत बल्लाभापारा घात हटखोला, पश्चिम मेदिनीपुर जिले खड़गपुर गोलबाज़ार मार्केट, मालदा जिले के चंचल थाना के खारबा गांव और मालदा जिले के ही कलियाचक पुलिस थाने के पीछे ऋषिपारा आदि स्थान शामिल हैं.

दो समुदायों के बीच भड़की हिंसा से खड़गपुर के कई इलाकों में फायरिंग और बमबाजी हुई. इसके अलावा कई दुकानों में तोड़फोड़ और आगज़नी की भी खबर है.

इस हिंसा में पुलिसकर्मियों को भी नहीं बख्शा गया और खड़गपुर में गंभीर रूप से घायल एक थाना प्रभारी के अलावा पानागढ़ में भी दो पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी मिली है.

बुधवार को आधी रात के करीब शुरू हुई साम्प्रदायिक हिंसा में खड़गपुर के कई इलाके गोलियों व बमों की आवाज से दहल गए. बीसियों मोटरसाइकिल और कारों में आग लगा दी गयी. 30 से अधिक दुकानों में तोड़फोड़ की गयी और एक गोदाम को आग के हवाले कर दिया गया.

हिंसा ने शहर के गोलबाजार, गोल खोली, भुईंया पाड़ा समेत कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया. परिस्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल व सैफ के जवानों को इलाके में तैनात किया गया है़.

उपद्रवियों को भगाने के लिए पुलिस को हवा में फायरिंग व आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा. घटना के बाद शहर में धारा 144 लगा दी गयी है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खड़गपुर थाना प्रभारी ज्ञानदेव प्रसाद पर उपद्रवियों ने जानलेवा हमला किया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गये. उन्हें घायल अवस्था में खड़गपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया. घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय विधायक दिलीप घोष अस्पताल पहुंचे.

विधायक दिलीप घोष ने कहा कि पुलिस और प्रशासन की लापरवाही के कारण शहर में हिंसा भड़की है. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस पुलिस को सामने रख कर मेरी छवि खराब करना चाहती है़, लेकिन उनकी मंशा पूरी होनेवाली नहीं है.

उन्होंने कहा कि वह शहर को संप्रदायिकता की आग में जलने नहीं देंगे, घटना की पूरी जानकारी केंद्र सरकार को दी गयी है. इसे रोकने का पूरा प्रयास किया जा रहा है़.

पानागढ़ सिलामपुर में दो पुलिसकर्मियों सहित 11 घायल

कांकसा थाना अंतर्गत पानागढ़ सिलामपुर में गुरुवार की देर शाम दो समुदायों के बीच साम्प्रदायिक हिंसा हुई. इसमें दो पुलिसकर्मियों समेत दोनों पक्षों से कुल 11 लोग घायल बताए जा रहे हैं.

क्षेत्र में फैले तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल और रैपिड एक्शन फ़ोर्स को इलाके में उतारा गया. छापामारी अभियान चलाकर पुलिस ने 42 आरोपियों को गुरुवार रात ही गिरफ्तार किया.

सभी को अगले दिन शुक्रवार को दुर्गापुर महकमा कोर्ट में पेश किया गया. गिरफ्तार छह आरोपियों को सात दिन के लिए पुलिस रिमांड पर लिया गया है.

उल्लेखनी है कि बुधवार को मुहर्रम का अखाड़ा निकाला गया था. इसी दौरान दुर्गापूजा प्रतिमा के विसर्जन का भी जुलूस निकला था. पुलिस द्वारा गांगबिल रास्ते को ही उपयोग करने को कहा गया था.

बताया जाता है कि वाहनों के लगातार आवागमन से नाराज होकर ग्रामीणों ने रास्ता बंद कर दिया. इससे आनंदपुर के एक समुदाय के लोग भड़क गये. हालांकि यह मामला यहां शुरू होकर ठंडा हो गया था.

इसके बाद गुरुवार को हनुमान मंदिर के पास आनंदपुर गांव के कुछ असामाजिक तत्वों ने आपत्तिजनक हरकत की. इसके बाद ही दोनों समुदाय के बीच सिलामपुर स्थित जामतला मोड़ पर झड़प के बाद संघर्ष शुरू हो गया.

उपद्रवी तत्वों ने कई दुकानों में तोड़फोड़ की. खबर मिलने के बाद घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन उपद्रवी तत्वों ने पुलिसकर्मियों पर भी हमला कर दिया और भारी पथराव किया. अतिरिक्त पुलिस बल बुला कर स्थिति नियंत्रित की गयी.

पूरे घटनाक्रम में दो पुलिसकर्मियों समेत दोनों पक्षों से कुल 11 लोग घायल हो गये. पुलिस ने स्थिति नियंत्रित की तथा रातभर छापेमारी अभियान चलाया.

एक स्थानीय तृणमूल नेता व उपप्रधान आइनुल हक ने कहा कि मंदिर के पास कोई आपत्तिजनक घटना नहीं हुई. उपद्रवी तत्वों ने झूठी अफवाह फैला कर स्थिति को तनावपूर्ण किया. इसके बाद ही संघर्ष शुरू हुआ.

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