मौलाना के घर में सेंधमारी

पिता जी पुराने जमाने के किस्से सुनाया करते थे.

यूँ हमारे गाँव में तो रेलगाड़ी 1904 में ही आ गयी थी पर आप रेल से हर जगह तो नहीं जा सकते. उन दिनों तो साइकिल भी दुर्लभ होती थी. 10-20 गाँवों में किसी रईस के पास साइकिल होती. कहीं आना जाना हो तो बैलगाड़ी वरना पैदल.

गुंडई बहुत थी, पर इलाके का गुंडा वो होता जिसकी लाठी में दम होता, जिसके पास सबसे ज़्यादा लठैत वो माफिया.

उन दिनों जमीन की मारामारी न थी. हमारे ताऊ जी बताते थे कि लोग सैकड़ो बीघा जमीन बस यूँ ही छोड़ दिया करते थे…. 1 रुपया सालाना लगान न दे पाने के कारण.

हमारे गाँव में एक मोलू अहीर थे जिनकी 8 या 10 बीघा जमीन गाँव के एक शातिर ग्राम प्रधान ने सिर्फ भेली यानी गुड़ और मट्ठा पिला के ले ली… हमारे दादा जी ने घर के पीछे की एक बीघा जमीन अपने एक सेवक कुम्हार को यूँ ही दे दी थी घर बनाने को….

वाह ……. क्या ज़माना रहा होगा यार!

चोर उन दिनों भी थे. घरों में चोरियां ज़्यादातर सेंध लगा के होती थीं.

सेंध लगाने का मतलब होता था मिट्टी से बनी घर की दीवार काट के उसमें इतना बड़ा छेद कर लेते थे कि आदमी घुस जाए. अब दीवार काटना इतना आसान काम नहीं, चाहे मिट्टी की ही क्यों न हो. एक तो पुराने घरों में मिट्टी की दीवारें आजकल की तरह 9 इंच नहीं बल्कि एक या डेढ़ मीटर तक मोटी होती थीं.

अब इतनी मोटी दीवार किसी फावड़े या सब्बल से तो खोद नहीं सकते थे…. खोदने से आवाज़ होती थी और गृहस्वामी के जाग जाने का खतरा होता. सो, सेंध लगाने के लिए एक विशेष औजार होता था जिसे छाती के जोर से दीवार पर दबाते तो वो एकाध सेंटीमीटर अंदर चुभ जाता और उतनी दीवार कट जाती.

उन दिनों कहा जाता था कि सेंध लगाना हिक्का के ज़ोर पे… हिक्का यानी छाती… जिसकी छाती में जोर होगा वही सेंध लगा सकता है. इसलिए उन दिनों जरायम की दुनिया में हिक्का के जोर वाले लोग मशहूर थे… उनकी शान में कसीदे पढ़े जाते… अरे भैया…. एक घंटे में दीवार काट देता है….

इसके अलावा एक और दिलेरी चाहिये होती थी…. दीवार तो कट गयी…. अब सबसे पहले कौन घुसे? कई बार ऐसा होता कि इधर सेंध लग रही उधर घर में जाग पड़ गयी…. और टोला भर सब लाठी बल्लम ले के उसी घर में जुट गया…. कि आओ बेटा…. आज बताते हैं….

ऐसे में जो सबसे पहले घुसा वही तो ज़्यादा पिटेगा. सो सबसे पहले घुसने के लिए कलेजा चाहिए. उसमें भी लोगों ने औजार बना लिए थे. पैरों में बांस की खपच्ची बाँध लेते… ऐसी जैसे क्रिकेट में बैट्समैन पैड पहन लेता है… क्योंकि पैर पहले घुसाते थे न सेंध में…. मार भी पैर पर ही पड़ती थी.

सेंध लगने के बाद गिरोह घर में घुसता और कीमती सामान ले जाता। कई चोरियाँ तो ऐसी सुनी जिसमें चोर सब बैलगाड़ी में भर के, यहां तक कि अनाज भी ले गए.

हमारे बगल के गाँव के एक बाऊ साहब अपने जमाने के बड़े नामी सेंधमार और लठैत थे. उनके किस्से आज तक मशहूर हैं. एक बार उनको इसी चोरी-सेंधमारी में जेल हो गयी. उसी जेल की बदौलत जीवन भर स्वतन्त्रता सेनानी पेंशन पाई और रेल के AC पास के मज़े लिए.

बहरहाल, मोदी जी ने भी साबित कर दिया है कि उनके हिक्का में भी बड़ा जोर है. वाकई 56 नहीं 66 इंच की छाती है. पाकिस्तान को घर में घुस कर मार आए.

हिक्का के जोर पे सेंध लगती है. मुस्लिम वोट में सेंध लगा दिए हैं.

मियाइन सब कितना ही अल्लाह अल्लाह करें…. 4 निकाह और 3 तलाक़ से कोई खुश नहीं… ऊपर से वो काले रंग का नायलॉन-पॉलिएस्टर का बुर्का…. अजी कौन रहना चाहता है इस जहालत में….

मौलाना साहेब कितना भी चिल्लाएं… मियाइन सब राजी हैं…. मोदी जी ने ठान लिया है….. वो मुस्लिम महिलाओं को 4 निकाह और 3 तलाक़ से मुक्ति दिला के रहेंगे…. मियाइन ईवीएम पर कमल का बटन दबाएगी इस बार…. यानी मौलाना के घर में सेंधमारी.

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