हाड़जोड़ : टूटी हड्डी जोड़ने के लिए रामबाण इलाज

हाड़जोड़ को अस्थिजोड़ भी कहा जाता है. हाड़जोड़ की बेल होती है, जिसमें हर 5 अंगुल में गांठ होती हैं. इसकी कलम को काटकर हम नई बेल लगा सकते हैं.

हाड़जोड कई प्रकार की होती है. इसकी पहचान दो धार, तीन धार, चार धार इस प्रकार से होती है. हाड़जोड़ के लाल रंग के मटर के दाने के बराबर फल लगते हैं. बरसात में फूलती है और ठण्ड में फल आते हैं.

हाड़जोड़ में कैल्शियम कार्बोनेट और फास्फेट होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है. आयुर्वेद में टूटी हड्डी जोड़ने में इसे रामबाण इलाज माना गया है. आज भी छोटे गाँवो में लोग इसका उपयोग अपने अपने पशुओं की हड्डियाँ टूट जाने पर करते हैं.

इसके तने को तेल में भुनकर हड्डी पर बांधने से जल्दी ठीक होती है. रक्त प्रदर और मासिकस्राव अधिक होने पर इसके 10 से 20 मिली. रस में गोपीचंदन 2 ग्राम, घी एक चमच और शहद 4 चमच के साथ लेने से ठीक हो जाता है.

यह वात और कफ का नाश करती है. गरम, दस्तावर और कीड़ों को मारती है. बवासीर को दूर करने के साथ ही यह आंखों की बीमारियों को भी दूर करती है. वीर्य को भी बढ़ाती है.

– नन्द किशोर प्रजापति

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