व्यंग्य : सर्जिकल स्ट्राइक का सच

28 सितंबर 2016 की रात. दस जनपथ के सोनिया जी के घर पर भयंकर गहमागहमी है. कांग्रेस के बड़े बड़े नेता मौजूद हैं. कुछ समाजवादी और वामपंथी भी हैं. तभी कांग्रेसी नेता सुरजेवाला एक लैपटॉप और बड़ा सा नक्शा लेकर आते हैं और बताते हैं कि वे सीधे राहुल गांधी, जो यूपी में किसान कल्याण के लिए यात्रा कर रहे हैं, के पास से आ रहे हैं.

हॉल में सोनिया जी, मनीष तिवारी और संजय निरूपम के साथ प्रवेश करती हैं. उड़ी हमले के बाद से ही ठीक से सो ना पाने के कारण इनकी आंखे लाल हैं. सोनिया जी का इशारा पाकर निरूपम हाल में मौजूद लोगों को बताते हैं कि कैसे एक बार फिर से देश की अस्मिता का सवाल आन पड़ा है?

आप सब तो जानते ही हैं कि देश का पूरा जिम्मा गांधी परिवार के उठाने की ही शर्त पर अंग्रेजों ने हिंदुस्तान छोड़ा था, तो इस नाते इस कठिन घड़ी में ये परिवार देश के साथ खड़ा है. क्या हुआ कि सरकार दूसरे की है, पर देश तो गांधी परिवार का ही है ना? हम लगातार सेना के संपर्क में हैं और उनको जरूरी निर्देश दे रहे हैं.

तभी भीड़ में से रास्ता बनाते हुए सुरजेवाला सोनिया जी तक पहुंचते हैं और उनके कान में कुछ कहते हैं. सोनिया जी और संजीदा होकर भीड़ में से एक दो और लोगों को लेकर अंदर के एक कमरे में चलीं जातीं हैं, जिसको अस्थायी वार रूम में तब्दील किया गया है.

सुरजेवाला लैपटॉप को प्रोजेक्टर से जोड़कर पावर प्वाइंट वाला प्रजेंटेशन देते हैं. निरूपम जी वहां मौजूद सुरक्षाबलों से और मनीष तिवारी हॉट लाइन पर राहुल जी से बात करते हैं. थोड़ी देर बाद निगाहों निगाहों में ही सबकी बात होती है और सोनिया जी हां में सर हिला देतीं हैं.

अगले दिन दोपहर के आसपास टीवी पर खबर आती है कि भारत ने पीओके में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक कर दिया है. कई आतंकी कैंप ध्वस्त हुए हैं. रक्षा मंत्री ये खबर गोवा बीच के एक होटल में देखते हैं और तुरंत कच्छ के रण में पतंग उड़ाते प्रधानमंत्री को इसकी खबर देते हैं.

चारों चारो तरफ फोन खटखटाने लगते हैं और आनन फानन में सरकार की तरफ से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस पूरे सर्जिकल स्ट्राइक का क्रेडिट ले लिया जाता है और कांग्रेसी बेचारे इतना बड़ा काम करने के बाद भी मुंह नहीं खोल रहे हैं.

तो मित्रों ये है सर्जिकल स्ट्राइक का पूरा सच, जिसे कांग्रेस ने देशहित में अभी तक नहीं बताया है. ये खबर उस दिन सोनिया जी के यहाँ मौजूद ‘खटिया’ के सप्लायर ने नाम ना लिखने की शर्त पर बताई, जो अपने पेमेंट के सिलसिले में वहां गया था.

सरकार को सर्जिकल स्ट्राइक पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, जैसे विपक्ष वाले नहीं कर रहे हैं.

(व्यंग्य )
– सुनील पाण्डेय

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