सर्जिकल स्ट्राइक पर भला क्यों न की जाए राजनीति!

भारत की पूरी राजनीतिक जमात, पूरी राजनीतिक व्यवस्था आजकल एक ही बात बोल रही है.

सर्जिकल स्ट्राइक पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. सेना के शौर्य और पराक्रम का श्रेय सरकार और भाजपा को नहीं लेना चाहिए.

क्यों नहीं लेना चाहिये?

पठानकोट और उड़ी हमले पर क्यों हो रही थी राजनीति?

पठानकोट हमला किसकी विफलता थी?

सेना की. बीएसएफ़ की. सीमा के प्रहरियों की. वायु सेना की.

पर गाली किसको दी गयी?

मोदी को.

छाती किसकी नापी गयी?

मोदी की.

विदेश नीति की आलोचना किसने झेली?

सरकार ने. मोदी ने.

उड़ी हमला किसकी नाकामी थी?

सेना की… सीमा के प्रहरियों की… सुरक्षा बलों की.

पर गाली किसको दी गयी?

मोदी को.

राजनाथ को.

अजित डोभाल को.

छाती किसकी नापी गयी?

मोदी की.

आलोचना किसकी हुई?

मोदी की विदेश नीति की…. मोदी की पाकिस्तान नीति की….. शाल-साड़ी डिप्लोमेसी की.

इस्तीफा किसका माँगा गया?

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का.

उड़ी हमले में क्या किसी ने उस ब्रिगेडियर को गाली दी जिसकी सुरक्षा चूक के कारण आतंकी अन्दर तक घुस आये? किसी ने उस ब्रिगेडियर का इस्तीफा माँगा?

नहीं….

इसका मतलब ये हुआ कि सेना की नाकामी पर भी सेना से, न सवाल पूछे जायेंगे, न सेना को गाली दी जायेगी…. सेना की असफलता का खामियाजा भी राजनीतिक नेतृत्व को भुगतना पडेगा. उसके लिए मोदी को ही गाली सुननी पड़ेगी.

जब राजनीतिक नेतृत्व, सेना की असफलता के लिए गाली सुनता है तो सेना की सफलता पर राजनीतिक नेतृत्व की वाह-वाह क्यों न हो?

यदि आप पठानकोट और उड़ी के लिए मोदी को गाली देते हैं तो सर्जिकल स्ट्राइक के लिए उनकी पीठ क्यों नहीं थपथपाते?

यदि आप पठानकोट-उड़ी पर मोदी को गाली देते हैं तो क्या ये राजनीति नहीं?

असफलता का ठीकरा यदि किसी के सिर फोड़ते हो तो सफलता का श्रेय क्यों नहीं देते?

कल्पना कीजिये कि ये सर्जिकल स्ट्राइक फेल हो जाती, तो क्या होता?

पाकिस्तान यदि एकाध हेलिकॉप्टर मार गिराता और 10-20-50 जवान वहाँ फंस जाते, बंधक बना लिए जाते…. तो क्या होता?

आज इसी मोदी की और इसी सरकार की आप लोग क्या दशा बनाते?

क्या सेना को गरियाते??? हरगिज़ नहीं.

मोदी को मुंह छिपाना मुश्किल हो जाता.

चुल्लू भर पानी नसीब न होता डूब मरने को…..

इसलिए ये जो पॉलिसी है न कि मीठा-मीठा गप्प और कडवा-कडवा थू…. ये नहीं चलेगी.

सेना का शौर्य और पराक्रम अपनी जगह….. पर असली शौर्य, असली पराक्रम उस लीडरशिप का, जिसने इतना बड़ा निर्णय लिया, इतना बड़ा जोखिम लिया…. और सफल स्ट्राइक के बाद भी दुश्मन को ऐसा बाँध दिया कि चूं तक न करने दी.

मोदी बेशक सीना न ठोकें, हम तो ठोकेंगे. पूरी राजनीति करेंगे जी… पूरा लाभ लेंगे.

क्यों न लें? बहुत गाली सुनी है…अब पूरा मज़ा लेंगे.

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