पाकिस्तान में मंदिर : कटासराज, शिव और अन्य देवी देवताओं के मंदिरों का समूह

कटासराज, भगवान शिव और अन्य देवी देवताओं के मंदिरों का समूह और हिन्दुओं की महानतम श्रद्धा का प्रतिक, पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के चकवाल जिले में स्थित है.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के प्रथम महानिदेशक श्री एलन कनिंघम (सन 1872-73) के अनुसार, कटासराज पंजाब प्रान्त में हिन्दुओ का ज्वाला मुखी के बाद दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है. कहा जाता है के पांडवो ने यहाँ वनवास के 12 वर्ष बिताये थे और सातघर के अभयारण्य का निर्माण किया था.

कटासराज के मंदिर अपने आप में 1500 सालो से जयादा वर्षो से बौद्ध काल से ब्रिटिश शासन से अब तक अपनी धरोहर संजोये हुए हैं……..

ये मंदिर पाकिस्तान के चकवाल गाँव से लगभग 40 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर कटस नामक स्थान पर स्थित है. पाकिस्तान में स्थित इस मंदिर को कटासराज के नाम से जाना जाता है.

इस मंदिर में भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है तथा इस मंदिर के बारे में कहा जाता ही कि यह महाभारत के समय त्रेतायुग में भी था परन्तु कुछ लोगों का कहना है कि यह मंदिर सिर्फ 900 साल पुराना है.

इस मंदिर में स्वयंशम्भू शिव का शिवलिंग स्थापित है तथा लोगों की मान्यता है जब पांडव वनवास के समय यहाँ आये थे तो उन्होंने इस मंदिर और शिवलिंग का निर्माण किया था.

पांडवों ने वनवास के समय लगभग चार साल यहाँ बिताये थे तथा अपने रहने के लिए सात महलों का निर्माण करवाया था जो अब सात मंदिर के नाम से कटासराज में स्थित है.

पाकिस्तान में स्थित यह कटासराज मंदिर वहां रह रहे केवल हिन्दू अल्पसंख्यको के श्रद्धा का ही केंद्र नहीं है बल्कि मंदिर के साथ लगा बौद्ध स्तूप तथा सिख हवेलिया वहाँ बसे अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लिए भी श्रद्धा का केंद्र है.

मंदिर के निकट ही एक सुन्दर कुण्ड भी है जिसका पानी दो रंग का है. जिस स्थान पर कुण्ड के पानी कम गहरा है उस स्थान पर कुण्ड के पानी का रंग हरा तथा अधिक गहरे स्थान वाली जगह पर पानी का रंग नीला है.

मान्यता है मंदिर के इस कुण्ड का निर्माण भगवान शिव के आंसू से हुआ था. जब भगवान शिव की पत्नी सती हवन कुण्ड की अग्नि में कूद गयी तो उनके वियोग में भगवान शिव के आँखों से दो बून्द आंसू गिरे थे.

भगवान शिव के आंसू के एक बून्द से कटासराज के इस कुण्ड का निर्माण हुआ तथा दूसरा आंसू का बून्द पुष्कर में गिरा था. यह भी कहा जाता है कि इसी कुण्ड के तट पर महाभारत काल में यक्ष ने युधिष्ठर से प्रश्न पूछे थे.

–  मोनिका शर्मा ‘सुमित्रा’

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