मुहर्रम पर ममता, पूजा पर प्रहार : मूर्ति विसर्जन की पाबंदी पर कोर्ट की फटकार

भाजपा को “भयानक जाली पार्टी” कहने वाली ममता का अल्प संख्यकों पर प्रेम किसी से छुपा नहीं है. लेकिन बात यहाँ हिन्दू मुस्लिम की भावनाओं की नहीं, बल्कि दोनों समुदायों की भावनाओं का फायदा उठाकर उस पर हो रही राजनीति की है.

ममता बनर्जी सरकार मुसलमानों को खुश करने के लिए हिंदुओं पर पाबंदियां लगा रही है. यह बात किसी और ने नहीं, बल्कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने कही है. दरअसल पश्चिम बंगाल सरकार ने मुहर्रम के चलते दुर्गा प्रतिमाओं विसर्जन के लिए एक समयसीमा तय कर दी थी.

ऐसा सिर्फ इसलिए किया गया ताकि मुसलमानों को मुहर्रम मनाने में कोई दिक्कत न हो. ममता सरकार ने फतवा जारी किया था कि दुर्गा पंडाल वाले 11 अक्टूबर को शाम 6 बजे से पहले-पहले विसर्जन कर लें. अगर वो ऐसा नहीं कर पाए तो उन्हें 13 तारीख के बाद ही इजाज़त मिलेगी, क्योंकि 12 को मुहर्रम है.  कोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर दिया और ममता बनर्जी सरकार पर टिप्पणी की कि वो धर्म के आधार पर भेदभाव कर रही है.

सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि “हम कठिन दौर में रह रहे हैं. ऐसे में धर्म के साथ राजनीति को मिलाना खतरनाक साबित होगा. एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करना वाला कोई भी फैसला नहीं लिया जाना चाहिए. सरकार के इस तरह के मनमाने फैसलों से असहिष्‍णुता पैदा होगी.

साफ दिख रहा है कि राज्‍य सरकार का यह फैसला बहुसंख्‍यकों की कीमत पर कि अल्‍पसंख्‍यकों को खुश करने की नीयत से लिया गया है. साथ ही इसमें फैसले का कोई औचित्य भी नहीं बताया गया है.”

कोर्ट ने आगे कहा कि “इतना काफी है कि दुर्गा विसर्जन और मुहर्रम के रास्ते अलग-अलग तय कर दिए जाएं. इससे पहले कभी विजयदशमी के दिन दुर्गा की मूर्तियों के विसर्जन पर पाबंदी नहीं लगाई गई. 1982 और 1983 में विजयदशमी के अगले दिन मुहर्रम पड़ा, लेकिन उस समय कोई पाबंदी नहीं लगार्इ गई.”

दुर्गा पूजा पर चार साल से पाबंदी

ममता बनर्जी के इसी रवैये की एक मिसाल बंगाल के बीरभूम जिले का कांगलापहाड़ी गांव है. गांव में 300 घर हिंदुओं के और 25 परिवार मुसलमानों के हैं. इस गांव में चार साल से दुर्गा पूजा पर पाबंदी है. मुसलमान परिवारों ने जिला प्रशासन से लिखित में शिकायत की कि गांव में दुर्गा पूजा होने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है. क्योंकि दुर्गा पूजा में बुतपरस्ती होती है.

शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन ने दुर्गा पूजा पर बैन लगा दिया. गांव के लोग जगह-जगह फरियाद करके थक गए, लेकिन इस साल लगातार चौथे साल यहां दुर्गा पूजा नहीं हुई.

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