ये तो कहो, कांग्रेसी नेताओं की औलादों, दामादों और सालों को बचाने क्यों छोड़े गए थे दर्ज़नों आतंकी?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जवानों के खून की दलाली करने वाला दलाल कहने वाले राहुल गाँधी का वकील बनकर, राहुल की उस उद्दंड, असभ्य, अराजक टिप्पणी का बचाव करने उतरे कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल ने  भाजपा पर हमला करने कंधार कांड में छोड़े गए आतंकियों का राग अलापा.

सिब्बल का कहना था कि, कांधार में जिन 3 आतंकवादियों को छोड़ा था, उनमें आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का चीफ मौलाना मसूद अज़हर भी था, इसलिए भाजपा जैश-ए-मोहम्मद को जन्म देने की गुनाहगार है. यदि कांधार में मसूद अज़हर को ना छोड़ा गया होता तो देश में आज आतंकवादी हमले ना हो रहे होते.

आज से पहले भी कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह समेत कांग्रेसी प्रवक्ताओं की फौज इसी तरह के आरोप कांधार में छोड़े गए तीन आतंकवादियों को लेकर लगाती रही है.

अतः कपिल सिब्बल और उनके नेता राहुल गाँधी, उनकी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह, कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ताओं की फौज और कांग्रेस पार्टी को देश को यह जवाब देना चाहिए कि..

कांग्रेसी नेताओं की औलादों, दामादों और सालों की जान, कांधार में तीन आतंकवादियों के बदले रिहा कराये गए 166 निर्दोष नागरिकों के प्राणों से ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों थी?

कपिल सिब्बल और राहुल गाँधी समेत पूरी कांग्रेसी फौज को यदि मेरा सवाल समझ में नहीं आया हो तो उन्हें  केवल पांच प्रकरण याद दिलाना चाहूँगा. हालांकि आतंकवादियों के साथ ऐसी कांग्रेसी सौदेबाजी की सूची बहुत लम्बी है लेकिन कांधार काण्ड को लेकर विधवा विलाप करनेवाली कांग्रेसी फौज को आइना दिखाने के लिए  फिलहाल यह 5 प्रकरण ही पर्याप्त हैं.

पहला प्रकरण है उस ‘तसद्दुक देव’ की रिहाई, जो भूतपूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा वर्तमान में राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद का ‘साला’ है और जिसका जनवरी 1992 में अपहरण किया गया था और उसे छुड़ाने के लिए 17 जनवरी 1992 को तीन दुर्दांत आतंकवादियों को केंद्र की तत्कालीन केंद्र सरकार ने छोड़ दिया था।

दूसरा प्रकरण है वो ‘नाहिदा सोज़’, जो यूपीए सरकार के भूतपूर्व केन्द्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज़ की सुपुत्री है और जिसका अपहरण अगस्त 1991 में किया किया गया और उसे छुड़ाने के लिए तत्कालीन दुर्दांत आतंकवादी मुश्ताक़ अहमद को बिना शर्त छोड़ दिया गया था.

तीसरा प्रकरण है वो ‘मुस्तफा असलम’ जो जम्मू-काश्मीर प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष गुलाम रसूल कार का दामाद था और जिसका 1992 में अपहरण किया गया था और जिसको छुड़ाने के किये 7 दुर्दांत आतंकियों को बिना शर्त छोड़ दिया गया था.

चौथा है वो ‘नसरुल्लाह’ जो पूर्व जम्मू कश्मीर सरकार के पूर्व मंत्री जी एम मीर लासजन का सुपुत्र था. जिसका 1992 में अपहरण कर लिया गया था और जिसे छुड़ाने के लिए 7 दुर्दांत आतंकवादियों को बिना शर्त छोड़ दिया गया था।

पांचवां प्रकरण है, एक सप्ताह तक हज़रत बल में दावत-ए-बिरयानी देने के बाद दर्जनों पाकिस्तानी आतंकियों को वापस पकिस्तान भाग जाने का सेफ पैसेज देने के लिए सेना को मजबूर करने वाली केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार का वह कुकर्म, जिसे देश आज भी नहीं भूला है.

उल्लेखनीय है कि, ये फैसले लेने वाली कांग्रेस की तत्कालीन केंद्र सरकार के वित्त मंत्री मनमोहन सिंह, रक्षा मंत्री शरद पवार और विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ही थे, गुलाम नबी आज़ाद भी संसदीय कार्य/उड्डयन मंत्री थे.

अतः कांधार में 166 निरीह-निर्दोष-निरपराध विमान यात्रियों के बदले 3 आतंकियों को छोड़ने पर आगबबूला होने का ढोंग-पाखंड करने वाली कांग्रेस से देश जानना चाहता है कि, कांग्रेसी नेताओं की औलादों, दामादों और सालों को बचाने के लिए दर्ज़नों आतंकवादी क्यों छोड़े गए थे…???

कश्मीर में खून की होली खेलने वाले पाक प्रशिक्षित-प्रायोजित दर्ज़नों आतंकवादियों को कब-कब और कैसे-कैसे, किस-किस के लिए रिहा किया गया? इसकी संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित झलक दे देती है कश्मीर के अत्यंत प्रतिष्ठित अंग्रेजी दैनिक Daily Excelsior में प्रकाशित रिपोर्ट जिसे इस लिंक पर जाकर  पढ़ा जा सकता है.

https://groups.google.com/forum/#!topic/soc.culture.pakistan/O9yR2Tc5eQs

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