आखिर पाकिस्तानी कलाकारों का बहिष्कार क्यों?

बात बड़ी स्पष्ट सी लगती थी यही सोच कर इस ‘क्यों’ का उत्तर देने की अब तक ज़रुरत ही नहीं समझता था. आज सोशल मीडिया के एक मूर्धन्य राष्ट्रवादी विद्वान को भ्रमित पाया, इसलिए इस ‘क्यों’ का उत्तर देना आवश्यक समझ रहा हूँ.

मित्रों, जब लडाई किसी से व्यक्तिगत ना हो तो यह प्रश्न उठना लाज़मी है कि पाकिस्तान सरकार के कुकर्मों की सज़ा, पाकिस्तानी कलाकारों को क्यों दी जाए?

पाकिस्तानी कलाकार जो धन हमसे कमाते हैं उसका करीबन 30% हिस्सा अपनी सरकार को टैक्स के रूप में देते हैं. शेष धन भी पाकिस्तान ही जाता है. जिसका उपयोग पाकिस्तान में ही होता है.

किसी भी सामान्य सीरियल में काम करने वाले कलाकार की सालाना कमाई करोड़ों में होती है. मूवी में काम करते हैं तो कद और काम के हिसाब से रकम और बड़ी होती है. इस अकूत कमाई से आप सब परिचित हैं.

हम-आप सिर्फ बड़े-बड़े नामों को जानते हैं पर पर्दे के पीछे काम करने वालों की संख्या बहुत बड़ी होती है. मुम्बई के सिनेमा जगत में छोटे-बड़े मिला कर करीबन पांच सौ से ज्यादा पाकिस्तानी कलाकार काम कर रहे हैं. यानी सिर्फ मुम्बई के फिल्म जगत से कई हजार करोड़ का धन हर वर्ष पाकिस्तान जा रहा है.

मित्रों, यही धन गोली बनकर हमारे सैनिकों के सीने को छलनी करता हुआ वापस लौटता है. अर्थात हम अपनी कब्र खोदने का इंतजाम खुद कर रहे हैं.

जिनको देश से प्यार है उन्हें इन पाकिस्तानी कलाकारों द्वारा निर्मित प्रत्येक फिल्म का बहिष्कार करना चाहिए. आपके द्वारा 350 रूपये के टिकट का कुछ हिस्सा इनकी कमाई बनता है और उसका कुछ हिस्सा पाकिस्तान पहुंचकर, पाकिस्तान का रक्षा बजट बन जाता है.

माने जब आप 350 रूपये की टिकट खरीद कर फिल्म का आनंद ले रहे होते हैं तभी आप 5-10 रूपये की गोली अपने सैनिकों के सीने पर मार चुके होते हैं… अनजाने में ही सही पर यह पाप हम सबसे हो रहा है.

इसके साथ ही हर कलाकार अपने साथ एक सोच, एक संस्कार लेके चलता है. जब जेहादी मानसिकता के कलाकार इतनी बड़ी संख्या में काम करेंगे तो उनकी मानसिकता फिल्म और गानों में प्रदर्शित होगी ही.

यही कारण है कि फ़िल्मी गीतों की शब्दावली में तमाम इस्लामिक शब्द शामिल होते जा रहे हैं… आयत, इल्म, मौला, कुरान, खुदा… आदि. फिल्मों के माध्यम से सांस्कृतिक अपपतन के षड्यंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं, इस विषय पर कभी विस्तार से लिखूंगा.

इन कलाकारों की मुम्बई में उपस्थिति दुबई के रास्ते हवाला के कारोबार को और आसान बनाती है. जो फिल्म निर्माता इनको भेजने से कतरा रहे हैं वो फिल्म निर्माता हवाला में संलिप्त है. वो रंगीन फिल्मों के साथ-साथ ब्लैक एंड वाइट के धंधे में भी हैं, यानी काले धन को सफ़ेद बनाने की मशीन के रूप में भी कार्य कर रहे हैं.

ये कलाकार तो हर हाल में अपने देश पाकिस्तान के साथ हैं. अब देखना है कि हम हिन्दुस्तानी इनका पूर्ण बहिष्कार करके अपने सीमा और संस्कृति की रक्षा करते हैं या इनके द्वारा बुनी बारूदी सुरंगों में फंस आत्मघात करते हैं.

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