चरित्र पर चिंतन : सप्लाई वहीं होती है जहां डिमांड हो

हमारे देश में जिन पैमानों पर गाहे – बगाहे लोगों को चरित्र प्रमाणपत्र दिए जाते हैं वो बेहद हास्यास्पद है, विशेषकर जब ऐसा समाज के बुद्धिजीवी लोगों द्वारा किया जाता है.

आज हमारा समाज इतना बदल चुका है कि उचित, अनुचित, चरित्रवान, चरित्रहीन जैसे शब्द अपना रूप बदल चुके हैं. आज के समय में मुख्य बात सिर्फ एक है “व्यक्ति विशेष का कम्फर्ट लेवल”.

मैं खुद एक स्त्री हूँ, मैं भी देखती हूँ अपने आस – पास कई महिलाओं को जो अपने लटके – झटकों में अपने सहकर्मी पुरुषों को मुग्ध कर अपने कई काम आसानी से करवा लेती हैं, हर उम्र के पुरुष फ़िदा रहते हैं उन पर, पर केवल वही पुरुष जो स्वयं “भ्रमर” प्रवृत्ति के होते हैं, यानि जो स्वयं इन सबमें कम्फर्ट होते हैं.

लेकिन मैं कभी ऐसे लोगों को चरित्रहीन नहीं मानती, न अपने तमाम संघर्षो की वजह मानती, कि “इन जैसे लोगों की वजह से मुझे धक्के खाने पड़ते है”, ना खुद सिर्फ इसी वजह से खुद को चरित्रवान मानती कि मैं ऐसी नहीँ हूँ… मैं उन महिलाओं की राह नहीं जा सकती क्योंकि मैं उसमें कम्फर्ट नहीं हूँ, मैंने मेहनत और संघर्ष की राह चुनी,ये मेरी निजी पसंद और फैसला है, लेकिन यदि कोई महिला अपने रूप – रंग या महिला होने का इस्तेमाल कर कामयाबी जल्दी पाती है तो मैं ऐसी महिला को चरित्रहीन नहीं कह सकती, बल्कि दिमागी तौर पर बेहद मज़बूत महिला कहूंगी.

योग्यता तो उस महिला में भी है , साथ ही चतुरता भी है … ऐसे पुरुष है तभी तो ऐसी महिलाएं भी है,सप्लाई वहीं होती है जहां डिमांड हो. अतः जब आप किसी ऐसी महिला पर एक ऊँगली उठाते हैं, तो आपकी बाकि उँगलियाँ स्वतः उन पुरुषों पर उठ जाती है जो इन महिलाओं के सहयात्री / सहवासयात्री बने …

यदि दो परिपक्व लोग आपसी सहमति से एकाधिक सबंधो में शामिल हैं तो उनमें से किसी एक को चरित्रहीन कहना गलत है. मैं चरित्रहीन उसे मानती हूँ जब ऐसे लोग सारी दुनिया को खुद जैसा मान हर महिला, हर पुरुष पर अटेम्प्ट लेने लगते हैं. उन्हें लगने लगता है कि सब चलता है.

मने आप अपनी निजी जिंदगी में 4 मर्दो से सम्बन्ध रखो या 10 महिलाओं से रिश्ता जोड़ो, शराब या सिगरेट के नशे में लीन रहो मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि आप अपना दायरा लांघ मुझे अपनी जमात में शामिल करने की कोशिश या दुराग्रह करेंगे तो वो मैं नही बर्दाश्त कर सकती …. और वही मेरे लिए चरित्र का एकमात्र आंकलन . मेरे लिए चरित्रवान होने का एकमात्र आंकलन है कि आपने अपने परिवार,समाज, विषय क्षेत्र या देश के लिए क्या किया?

बाकि आप क्या खाते हैं, क्या पीते हैं, किसके साथ सोते हैं इन बातों में मेरी कोई रूचि नहीं, इन विषयों पर प्रपंच करने का शौक गली – मोहल्ले में बैठी प्रपंच बुद्धि महिलाओं को ही होता है, हालांकि आजकल कुछ बुद्धिजीवी उन्हीं प्रपंच बुद्धि महिलाओं के स्तर पर उतर कर एक – दूसरे पर छिछले आरोप लगा रहे हैं.

गुस्से में कुछ लोग दूसरों के कपड़े फाड़ देते हैं पर ये लोग तो अपने ही कपड़े फाड़ने पर उतारूँ हैं इस कपड़ा फाड़ बौद्धिकता से भला किसी का नहीं हुआ, नुकसान सिर्फ साहित्य का हुआ.

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