हलाल के पीछे का अर्थशास्त्र

इस्लाम को समझना है तो इसके दो फेज़ हैं. पहला, यह जानें कि कुरान में क्या लिखा है? दूसरा, जो क़ुरान में लिखा है, एक सामान्य मुसलमान उसका क्या अर्थ समझता है?

“हलाल” एक छोटा सा शब्द है… इसका अर्थ हम और आप लगभग सही सही जानते हैं. आपको पता है कि पोर्क हराम है, मछली हलाल है, और दूसरे जानवरों का मांस, अगर एक खास तरह से काटा गया है तो हलाल है.

लेकिन एक मुसलमान जब मांस बाजार से खरीद कर लाता है तो उसे कैसे भरोसा होता है कि यह हलाल है या नहीं?

पहली बार लन्दन आया था तो हम कई लड़के-लड़कियाँ एक ही घर में रहते थे. हम सब साथ खाना बना कर खाते थे. मज़ा भी आता था, सस्ता भी पड़ता था.

उनमें हमारे बीच एक पाकिस्तानी लड़की भी थी. वह कभी हमारे साथ या हमारा बनाया हुआ खाना नहीं खाती थी. एक दिन हममें से एक को नौकरी मिली तो उसने सबको दावत दी. यानि मुफ्त का मुर्गा और बियर… हमने उस लड़की को भी इनवाइट किया… हिचकते हिचकते वह नीचे आयी. उसने कहा, वह सिर्फ हलाल खाती है. हमने बताया, हम उसी की सोचकर हलाल चिकन लेकर आये हैं. तब उसने डिटेल में हलाल का मतलब बताया..

अगर किसी मुस्लिम की दुकान से मुर्गा खरीद कर लाया गया तो वह हलाल है. अगर वह हलाल नहीं भी है, तो उसे खाने की सजा आपको नहीं मिलेगी, जो बेच रहा है उसे मिलेगी. अल्लाह क़यामत के दिन उससे हिसाब पूछेगा… आप मासूम हो, आपने तो भरोसा किया.

वहीँ आप अगर किसी गैर मुस्लिम की दुकान से कुछ खरीदते हो, तो चाहे वह हलाल बोल कर ही बेचे, वह हलाल नहीं है. क्योंकि गैर मुस्लिम पर भरोसा करना ही गुनाह है. अगर वह आपको गलत सामान देता है, तो अल्लाह उससे हिसाब नहीं लेगा… क्योंकि अल्लाह तो उन्हें ऐसे भी सजा देने वाला है. वहाँ अगर आपने कुछ खाया जो हलाल नहीं है तो जिम्मेदारी आपकी है.

अभी कुछ दिन पहले पल्लवी की एक पाकिस्तानी मित्र ने एक वेजीटेरियन रेस्टोरेंट के बारे में कहा – हम वहाँ नहीं जाते, वह हलाल नहीं है…

अब वेजीटेरियन में क्या हलाल? तो लीजिये… उस दिन दुकान में देखा – हलाल चीनी…

तो हलाल क्या है? जो मुसलमान से खरीदो वह हलाल है, बाकी सब हराम है…

अब इस हलाल के पीछे का अर्थशास्त्र भी समझ ही गए होंगे.

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