नेताजी ने गांधी को कहा था ब्रिटिश पुलिसवाला!

काटजू क्या है या क्या नहीं है, इस पर तो मैं कुछ नहीं कहूँगा लेकिन गांधी का मूल्यांकन तो 2014 तक हुआ ही नहीं था. जो हुआ था वो कांग्रेस, वामपंथी इतिहासकारों और पश्चिमी जगत के बुद्धिजीवियों के वर्ग पर आकर ही रुक गया था. जिसमें सिर्फ धब्बों को छुपाया गया था और राजनैतिक रोटी सेंकने के लिए, अर्धसत्य को सत्य के रूप परोसा गया था.

हंगामा सा हो गया था, जब प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के तत्कालीन अध्यक्ष जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने बयान देते हुए गांधी को ब्रिटिश एजेंट कह डाला था. 67 साल तक गांधी के महात्म्य के रूप को ही लोगों ने बेचा है तो इस तरह का मूल्यांकन गांधी का होना कोई बड़ी बात नहीं है.

मुझे लगता है काटजू का गांधी को ब्रिटिश एजेंट बतलाने का यह मकसद बिलकुल यह नहीं होगा कि गांधी ब्रिटिश सम्राज्य के पे-रोल पर थे. हाँ यह मतलब ज़रूर है कि गांधी को ब्रिटिश हितों की चिंता, भारत के बंटवारे से ज्यादा थी.

हे भारतवासियों! काटजू ने ऐसा कुछ नहीं कहा था जो पहले न कहा गया हो.

चलिए, मैं ले चलता हूँ इतिहास में, आज से करीब 80 साल पहले.

सुभाष चन्द्र बोस जी ने, अपने निर्वासन काल में एक किताब लिखी थी The Indian Struggle. यह किताब 2 भाग में थी. पहले भाग की मूल पाण्डुलिपि 1934 में सुभाष चन्द्र बोस के योरप से निर्वासित जीवन समाप्त कर भारत लौटने पर, करांची में ब्रिटिश शासन द्वारा जब्त कर नष्ट कर दी गयी थी.

इससे यह तो अंदाज़ा लग जाता ही कि वो किताब कितनी विस्फोटक रही होगी. इसकी एक प्रतिलिपि योरप में बच गयी थी, जो 1935 में इंग्लैंड में The Indian Struggle के नाम से प्रकाशित हुई थी.

इसमें 1920 से लेकर 1934 तक भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में हुए प्रयास, उसमें हुयी भूलें और संघर्ष के नेतृत्व की तीव्र आलोचना की गयी थी. इस किताब में गांधी की भूमिका और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान पर प्रकाश डाला था.

सुभाष चन्द्र बोस ने गांधी की आलोचना के साथ उनके मंतव्य पर सवाल उठाये थे. बोस ने उन पर यह इलज़ाम लगाया था कि गांधी ब्रिटिश साम्राज्य के प्रति बहुत नरम हैं और साम्राज्यवादी ब्रिटिश शासन से संघर्ष करने अयोग्य है.

अंत में बोस ने गांधी जी का आंकलन करते हुए कहा था, – ” वे (गांधी) ब्रिटिश सरकार के भारत में सर्वश्रेष्ठ पुलिसवाले है. (Bose was critical of Gandhi in the book accusing the Mahatma of being too soft and almost naive in his dealings with the colonial regime and who with his status quoism had become The Best Policeman The Britisher Had In India )

अब काटजू ने कह दिया, जो भारत की आज़ादी के सर्वश्रेष्ठ नायक सुभाष चन्द्र बोस जी ने 80 साल पहले ही लिख दिया था, फिर हंगामा है क्यों बरपा?

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