BREXIT और यूरोपियन यूनियन : अंतिम भाग

यूरोप की व्यवस्थाओं को समझना होगा। यूरोप में टैक्स रेट बहुत ज़्यादा हैं, लगभग 70% कमाई का हिस्सा टैक्स को जाता है।

इस बात को लेकर लेकिन किसी को कोई तकलीफ नहीं, क्योंकि टैक्स का पैसा ईमानदारी से उसी मद में खर्च किया जाता है जिसके लिए बजट होता है।

ज़िम्मेदार कर्मचारी, जवाबदेही का होना और गलती या भ्रष्टाचार होने पर निश्चित सज़ा… वहाँ हर चीज को सुचारु रूप से चलने में मदद करती है।

उदाहरण के लिए फ्रांस में बच्चों को 12वीं तक की शिक्षा, किताब, घर से लाने छोड़ने तक सब मुफ्त है, साथ में ये हिदायत भी कि ये माता पिता की ज़िम्मेदारी है कि बच्चा स्कूल जाए, नहीं भेजने पर कानूनन सज़ा मिलेगी।

सबका बीमा है और हर बीमारी के लिए सबको उच्च स्तर का इलाज उपलब्ध है। हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस आम जनता ले लिए उपलब्ध है। सड़कें यूरोप में वैसी ही है जैसी हिंदी फिल्मों में दिखती हैं, ट्रैन वैसी ही हैं जैसी दिखती है।

पैसेंजर से लेकर बुलेट ट्रैन सब मौजूद है। नाली बहने या उतराने की कोई समस्या नहीं। सफाई उन्नत स्तर की, सड़कों और गलियों की सफाई हमारे आपके ड्राइंग रूम के जैसी…

बेरोजगारों को रोजगारी भत्ता – एक निश्चित अवधि में रोजगार उपलब्ध कराना। सेवानिवृत्त हुए बुजुर्गों को पेंशन उपलब्ध कराना, एकल बुजुर्गों के लिए जिनके बच्चे साथ नहीं उनके रहने खाने और इलाज का उच्च कोटि की व्यवस्था।

वो बुजुर्ग जो बच्चों के साथ रहते हैं लेकिन दिन में एकल जीवन व्यतीत करते हैं उनके एक कॉल पर 15 मिनट के अंदर सहायता उपलब्ध कराना… ये सब कोई किस्सा-कहानी नहीं है… ये यूरोप के जीवन का एक अंग है। यूरोप के देशों की सरकारें ये काम करती है और ये उच्च स्तर की सुविधाएँ प्रदान करती है अपने नागरिकों को, काटे हुए टैक्स के बदले।

बीते वर्षों में यूरोप में इस ढाँचे को होने से कुछ बड़ी चुनौतियां आई हैं। हर काम ऑटोमेटिक होने की वजह से मानव कार्यकर्ता की जरूरत नहीं। मैंने एक देखा है कि लगभग 50 करोड़ का व्यवसाय करने वाली कंपनी में मात्र 17 कार्यकर्ता हैं जिसमे मर्केटिंग, अकाउंट, डिज़ाइन, ओर उत्पादन इंजीनियर सब शामिल है।

अगर ये automation नहीं होता तो लगभग 100 लोग काम करते। इस वजह से बेरोजगारी बढ़ी है। वहीँ दूसरी तरफ अपने बनाये सामान की गुणवत्ता कायम रखने की प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनी को ऑटोमेशन ज़रूरी है। इस वजह से एक बड़ा सरकारी खर्च बेरोजगारी भत्ते में जाता है।

एक और गणना के अनुसार अवकाश प्राप्त बुजुर्गों की पेंशन नए रोजगार पाये नौजवानों की तनख्वाह से ज्यादा है। सरकारों पर इस खाई को पाटने का भी दबाव है। उच्च गुणवत्ता के सामान होने से यूरोप में महंगाई भी है। आपूर्ति और मांग की खाई को पाटने की भी चुनौती है।

EU में शामिल कई देशों के अच्छे औद्योगिक देश नहीं होने की वजह से उनका भारी भरकम बोझ भी धनी EU देशों जैसे कि फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क, बेल्जियम, नीदरलैंड पर पड़ा और EU सहयोगी होने के नाते UK को भी एक निश्चित राशि का योगदान करना पड़ता था।

आंतरिक समस्याओं से जूझते EU देशों में सीरिया, जॉर्डन, इराक से युद्धरत देशों के प्रवासियों आने से समस्या बड़ी हो रही है। कई देशों जैसे डेनमार्क, नीदरलैंड, हंगरी, नॉर्वे, लक्सेमबर्ग, स्पेन आदि ने अपने देशों की सीमाएँ इन प्रवासियों के लिए बंद कर दी हैं।

जिन कारणों से इन प्रवासियों को अपना देश छोड़ना पड़ा, ये प्रवासी उन्ही अनुचित मांगों को मांगने लगे हैं। पिछले वर्ष फ्रांस के Lyon शहर में इन लोगों ने एक कार आग के हवाले कर दिया, स्टेडियम में बड़ी घटना को अंजाम दिया, एक फैक्ट्री में बारूद से भरा ट्रक घुसा के विस्फोट किया, जर्मनी में कई जगह तोड़फोड़ की। युवतियों से दुर्व्यवहार किया।

इन सब वजहों से इन देशों का युवा वर्ग इन प्रवासियों के खिलाफ है। EU समझौते के अनुसार इन प्रवासियों में से कुछ को UK को भी समावेशित करना था, लेकिन उसने दरवाज़े बंद किये हुए हैं।

EU के देशों का उसके उपर दबाव है। इस वर्ष के अंत तक EU में Turkey और Serbia का आना तय हैं। Bosnia और Herzegovina ने इसी वर्ष फरवरी में EU सदस्यता के लिए आवदन किया हुवा है।

UK की युवा जनता का मानना था कि जितनी जल्दी हो ब्रिटेन को EU से बाहर आ जाना चाहिए वरना ब्रिटेन में गंद फैलेगी। इसलिए युवाओं ने BREXIT के पक्ष में मतदान किया।

मेरा मत और निष्कर्ष : आने वाले वर्षों में BREXIT से ब्रिटेन तो मज़बूत रहेगा पर छोटे छोटे यूरोपियन देशों को नुक़सान होगा एवं बड़े देशों में विलय की सम्भावना बढ़ जाएगी। डेनमार्क की अगुवाई में Scandivanian देशों ने हाथ खड़े कर दिए हैं, फ़्रान्स और जर्मनी अकेले यूरोप का बोझ नही संभाल सकते।

Switzerland बजाय EU के, अपने हितों पर अधिक ध्यान देगा। Switzerland/ ब्रिटेन जैसे अमीर देशों के EU में ना होने से Eastern European Countries के survive नहीं कर पाने का योग बनेगा।

BREXIT से भारत पर प्रभाव : कुछ समय के लिए शेयर बाजार में उथल पुथल… लम्बी अवधि में देखें तो कुछ भी नुकसान नहीं। भारत की कंपनियों को फायदे की उम्मीद।

BREXIT और यूरोपियन यूनियन : भाग 2

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