BREXIT और यूरोपियन यूनियन : भाग 2

1995 में यूरोप के Luxemberg के एक छोटे से कस्बे Schengen में हुए समझौते के बाद Schengen एरिया अस्तित्व में आया। इसके बाद यूरोप की अप्रवासन और व्यवसायिक नीतियां भी तय हो गई।

1997 में मेरी पहली यूरोप यात्रा हुई। तय तरीकों से VISA मिला और हम तीन महीने की टेक्निकल ट्रेनिंग के लिए Germany पहुंच गए।

वहाँ पर कंपनी के Asia के प्रभारी Seigfreid Frei जिनसे हम उनके भारत दौरों के कारण पहले से परिचित थे, जिनका घर एक गांव Freiamt में था, उन्होंने अपने घर के पास एक छोटे से होटल में हमे ठहराया जिससे रोज वो कंपनी साथ ले जा सकें और हम साथ वापस आ सकें।

एक शनिवार सुबह Emendingen में हम Frei परिवार के साथ घूम रहे थे तो उन लोगों ने रविवार को France के शहर Colmar जो कुछ ही दूरी पर था, घूमने का कार्यक्रम बनाया। ये कार्यक्रम खास हमको घुमाने के लिए बना था।

Europe – खासकर जर्मनी, फ्रांस और डेनमार्क के लोगों के जैसे अतिथि का स्वागत पूरे विश्व में कहीं नहीं मिलेगा। हमने जब बताया कि हमारा VISA जर्मनी के लिए है तो उन्होंने चेक कर के कहा कि ये Schengen countries VISA है, इसलिए Schengen सदस्य देशों में जा सकते हैं।

इसके बाद हमारी और Mr. Frei के बीच वार्ता EU पर खूब हुई और हमने इसको समझा। इसके बाद Europe की अनेक यात्राएं हुई और वहाँ के मामलों को गौर से देखा और परखा।

EU के अंतर्गत आने वाले देशों के नागरिक एक दूसरे देश में बिना रोक टोक आ जा सकते हैं। व्यापार कर सकते हैं, व्यापार कर सबमें एक समान हैं। हर तरह की custom चुंगियाँ समाप्त कर दी गयी हैं।

हर देश का व्यापारी अपना ऑफिस या फैक्ट्री किसी देश में खोल सकता हैं। कोई भी किसी देश में काम कर सकता है। अच्छी सड़कें, तेज़ रफ़्तार रेल के कारण अक्सर एक देश में रहने वाले दूसरे देश में नौकरी के लिए भी जाया करते हैं।

इस EU में UK और Switzerland भी शामिल थे लेकिन सिर्फ व्यापारिक समझौते के तहत। इस देशों में Scehngen VISA मान्य नहीं है। मुझ जैसे non – European के लिए अलग VISA लेना पड़ेगा। लेकिन Europe के नागरिक इन देशों में एक आम Schengen एरिया के लोगों की तरह आना जाना और व्यापार कर सकते हैं।

इससे EU के अंदर व्यापारिक गतिविधियों को बल मिलना था, रोजगार के अवसर और यूरोप की समृद्धि मानी जा रही थी।

2002 में Euro मुद्रा आने के बाद पूरे EU में इस मुद्रा का चलन शुरू हो गया। Lira, DM, Franc, Kroner, Schilling आदि इतिहास बन गए लेकिन इसमें UK ने अपना Pound Sterling और Switzerland ने Swiss Franc को खत्म नहीं किया, न ही अन्य EU देशों की तरह Euro का वैल्यूएशन अपने मुद्रा से कराके Euro को अपनाया।

इस तरह की खुली सीमा से आया Internal – European माइग्रेशन का दौर। Europe के गरीब देशों जैसे रोमानिया, हंगरी, चेक गणराज्य, स्लोवानिया, ग्रीस, आदि से बड़ी संख्या में लोग Germany, France, Netherlands, Belgium में घुसने लगे।

इन लोगों को EU समझौते के अनुसार बेरोज़गारी भत्ता मिलने लगा। इन लोगों ने खाली पड़े मैदानों में बस्तियाँ बनानी चालू कर दी। Europe में भिक्षावृत्ति बढ़ी, Amsterdam, Berlin, Paris, Brussels, Frankfurt, Marscelle, जैसे बड़े व्यापारिक शहरों में भिक्षावृत्ति, वेश्यावृत्ति खुल कर बढ़ी और आए दिनों गैंग वॉर होने लगा।

France, Germany जैसे देश जो पूरी तरह लिबरल थे, जिन्होंने कभी दूसरे देशों पर राज किया था वहाँ पहले से ही उन देशों से भी लोग माइग्रेट होकर आये थे। France में तो मोरक्को, अल्जीरिया, Tunisia आदि से आने वालों की बस्तियाँ खूब बनी हैं।

EU समझौते के अनुसार इन लोगों को भी समावेशित करना पड़ा क्योंकि अब ये France के नागरिक हो चुके थे। चूँकि पूर्वी यूरोप अभी तक औद्योगिक और व्यावसायिक रूप से तरक्की नहीं कर पाया परन्तु EU का सदस्य था, तो EU के धनी देशों France, Germany, Belgium, Denmark को इन नुकसान में जाते देशों को कई बार इकनोमिक bail-out पैकेज भी देना पड़ा।

धनी देशों ने कई औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठान इन गरीब देशों में खोले और आगे बढ़ाने को कदम उठाए लेकिन ये देश गति नहीं पकड़ पाए। इन सब के बीच कई और देश EU में शामिल होते चले गए जैसे Baltic देशों का समूह।

कई वर्षों से EU में आने के लिए प्रयासरत Turkey और Kosovo को इस वर्ष के अंत तक EU में जगह मिल जाना तय हुआ है, इसके बाद Bosnia और Herzegovina को भी EU में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू है।

और फिर एक दिनन Mediterranean सागर के तट पर अदनान की लाश मिली…

क्रमशः…

BREXIT और यूरोपियन यूनियन : भाग 1

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