जिस भाषा में भारत को भारत न कह सकें, वह भारत की भाषा नहीं

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मैंने तो यह सोचा ही नहीं था कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान दोनों की दशा एक जैसी ही है.

पहले तो यह समझो कि हिन्दुस्तान नाम का कोई देश नहीं है, कभी हुआ करता था, कुछ सौ बरसों तक, अब वह भारत, पाकिस्तान और बांग्ला देश में बंट चुका है, इसलिए अगर तुम हिन्दुस्तान की बात करोगे तो पड़ोसियों को चिंता होगी कि तुम उन्हें हड़पना चाहते हो. इंडिया भी उसे ही कहा जाता था. इंडिया जैसा देश भी नहीं है.

तुमने भारतीय संविधान पढ़ा है?

इसके लिए संविधान पढ़ने की जरूरत नहीं. हमारे संविधान में बहुत कुछ गलत था. न होता तो इतनी बार संशोधन की जरूरत नहीं पड़ती. यह नहीं कह सकते कि अभी बहुत कुछ गलत बचा नहीं रह गया है जिसके लिए आगे संशोधनों की जरूरत पड़ सकती है.

इंडिया जिस नदी के नाम पर रखा गया था, वह पाकिस्तान में है. हिन्द जिस सिन्ध का ईरानी नाम था वह भी पाकिस्तान में है और देखो यह जो तुम ‘पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग’ गाते हो उसको भी राष्ट्र संघ में चुनौती दी जा सकती है.

तुम्हारे देश के किसी भूभाग को दूसरे के नक्शे में दिखा दिया जाय तो कोहराम मच जाता है और तुमने दूसरे देश का एक पूरा प्रान्त ही अपनी राष्ट्रगान में दबोच रखा है और उनको इसकी खबर ही नहीं. वह गाना ऐतिहासिक है, उसे विभाजित हिन्दुस्तान का राष्‍ट्रगान नहीं बनाना चाहिए था.

इस पर तो मैंने गौर ही नहीं किया था.

गौर तो तुमने इस पर भी नहीं किया होगा कि जो अपने राज्यों की या अंचलों की भाषाएँ हैं उनको राष्ट्रभाषाएँ कहा जाने लगा मानो तुम्हारा देश राष्ट्र मंडल हो, न कि राष्ट्र, और जिसे राष्ट्रभाषा के रूप में परिकल्पित किया गया था और व्यावहारिक रूप में जो आज भी राष्ट्र भाषा है क्योंकि इसी का टूटा-फूटा ज्ञान रखने वाला कोई न कोई तुम्हें उन क्षेत्रों के गांवों और अनपढ़ों में भी मिल जाएगा जिसने कसम खा रखी थी कि हम हिन्दी को राष्ट्राभाषा नहीं बनने देंगे.

पूरे भारतीय भूभाग में कहीं सघन, कहीं विरल इसी की उपस्थिति मिलती है, पर संविधान में इसे राजकाज की भाषा या ऑफिशियल लैंग्वेज कहा गया, भले उसमें काम न होता हो. राज्य भाषाएं राष्ट्रभाषाएं और राष्ट्रभाषा राजभाषा. यह उलटबांसियों का देश है यार.

तुम्हारी चले तो तुम इसे उपमहाद्वीपीय भाषा बना दो.

किसी महाद्वीप या उपमहाद्वीप के लिए एक भाषा की कल्पना अभी तक की नहीं गई. ऐसी नौबत आई तो हम इसे सार्क भाषा तो कह ही सकते हैं.

देखो, स्वाधीनता से पहले भारतवर्ष को दो राष्ट्रीयताओं का देश बनाने का प्रयत्न किया गया और उसे सचाई में भी बदल डाला गया. अब जो एक राष्ट्र बचा रह गया था उसे तुमने दर्जनों राष्ट्रीयताओं का देश बना दिया है. तुम ही सोचो तुम्हें कैसा बावला नेतृत्व मिला और उसने देश को तोड़ने का काम किया है या जोड़ कर रखने का. आज भी ऐसी शक्तियां हैं जो इसी काम पर लगी हुई हैं.

अच्छा यह बताओ, यदि तुम्हारा वश चले तो किसे राष्ट्रगान बनाओगे?

देखो, जब दुनिया में कहीं राष्ट्र की परिकल्पना तक नहीं थी, जब देव वंदना और राजा की वंदना के अलावा कोई वंदना तक न थी, उस समय एक कवि ने भारत के लिए एक वंदना गीत लिखा था.

मुस्कुराओ नहीं, इस देश में बहुत कुछ है जो पश्चिमी नजर से देखने वालों को चकित करता है उसमें यह कथन भी चकित कर सकता है, पर सचाई को नकारा तो जा नहीं सकता, स्वीकारा भले न जाए.

तुम किस गीत की बात कर रहे हो?

विष्णु पुराण में आए राष्ट्र गान की –

गायन्ति देवा किल गीतिकानि धन्यास्तु ते भारत भूमि भागे
स्वर्गापवर्गास्पद मार्गभूते भवन्ति भूय-पुरुषा सुरत्वात्

इस देश का नाम भारत है और युगों से यही नाम है. एक ईमानदार आदमी और स्वाभिमानी देश के लिए एक ही संज्ञा पर्याप्त है. दुनिया में किसी दूसरे देश के दो नाम नहीं होंगे. छद्मनाम चरित्रगत छद्मों की आशंका जगाते हैं. जिस भाषा में भारत तक नहीं कहा जा सकता, वह भाषा भारत की नहीं हो सकती.

तुम जानते हो तुम क्या कह रहे हो?

तुमको समझना होगा कि मैं क्या कह रहा हूँ क्योंकि डरा हुआ आदमी न सच को कह सकता है न समझ सकता है, यथास्थितिवादी होना उसकी नियति है. यदि यह नहीं समझ में आया कि क्या कह रहा हूँ तो इसका भाष्य करके बता दूँ कि मैं कह रहा हूँ हमने भावुकता से अधिक और विवेक से कम काम लिया, हम लोगों को खुश करने की कोशिश में अपना वजूद भूल गए.

गनीमत इतनी ही है कि अधिनायक की वन्दना हम करते हैं और अधिनायक पाकिस्तान में पैदा होते हैं, इसलिए किसी भी मामले में हमारी दशा पाकिस्ता‍न जैसी नहीं हो सकती. भाषा के मामले में भी. पाकिस्तान के पास राष्ट्र भाषा है, अपनी भाषा नहीं है.

पाकिस्तान के किसी भाग की भाषा उर्दू नहीं थी. वह उस पर लादी गई इसलिए चल नहीं सकी. उर्दू उनके लिए विदेशी भाषा थी या कहो मुहाजिर भाषा थी और मुहाजिरों के बीच बोली और दूसरों द्वारा लगभग समझ ली जाती है.

विदेशी भाषा में शुद्धता पर बहुत जोर होता है. मैट्रन के सामने बच्चे को पूर्णत: अनुशासित रहना होता है, वह लगातार सही होने की कोशिश में यन्त्र साधित और यन्त्रचालित शिशु बन जाता है. नियम कायदे मे बँध कर चेतना के स्तर पर गुलाम, वह केवल अपनी मां के साथ जो कुछ करें, शरारतें तक, कभी गलत नहीं होता.

जानते हो कामकाजी महिलाएं क्रेच में नन्ही उम्र में ही डाल कर उनके बचपन को क्रश कर देती है. इन बच्चों पर तरस भी आता है और इनके भविष्य को ले कर डर लगता है, उनके अपने लिए नहीं, उस समाज के लिए जिसमें बच्चों को मां की ममता से समय से पहले ही अलग कर दिया जाता है.

अब तुम बच्चों पर बात करोगे!

देखो मैं जिन्दा शब्दों में बात करता हूँ इसलि‍ए वे शब्द मुझे बीच-बीच में बांध लेते हैं, कहो लिपट से जाते हैं कुछ पलों के लिए. तुम मरे हुए, किताबों या कोशों से उठाए हुए या सुने-सुनाए अधमरे शब्दों में बात करने के आदी हो इसलिए मेरा उनको दुलराते हुए आगे बढ़ना तुम्हें भटकाव लगता है.

विषय पर तो आ यार.

तो हमारी स्थिति पाकिस्तान से इसलिए भिन्न है कि उसके पास जो राष्ट्रभाषा है वह भी बाहर से आई हुई है, मुहाजिर है, और जिसमें काम काज हो रहा है वह भी मुहाजिर है. और उसके जो राज्य हैं उनकी अपनी भाषाओं को महत्व दिया ही नहीं गया. या तो उनमें अंग्रेजी में काम होता है या थोड़ा बहुत उर्दू में. उनकी अपनी भाषाएं कराहने और गाली देने के काम आती हैं.

हमारे यहां यह कुशल है कि सभी राज्यों की अपनी भाषाएं और हिन्दी इसी के मध्य देश की भाषा है. पराई केवल अंग्रेजी है भले एक राज्य के कुछ लाख लोगों को ईसाई बना कर और अंग्रेजी सिखा कर यह दलील तैयार कर ली गई हो कि अंग्रेजी वहां की भाषा है. परन्तु सबसे बड़ा अंतर यह है कि हमारे यहां हिन्दी संपर्क भाषा है और औपचारिक संपर्क भाषा या राष्ट्रभाषा का स्थान ग्रहण कर सकती है, पाकिस्तान से अंग्रेजी को हटाना मुश्किल है.

वह ठठाकर हंसा, तुमने मुंगेरी लाल के सपने वाले सीरियल देखे थे.

मैंने वह सीरियल तो नहीं देखा पर जानता हूँ वह हास परिहास का था. मैं सीरियस हो कर यह बात कह रहा हूँ लेकिन आज तुम इसे समझ नहीं पाओगे.

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