जल्लाद किसी को सुधार नहीं सकता, सिर्फ मार सकता है

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बच्चों के साथ काम करते हुए बहुत अनुभव होते हैं. बेचारे बच्चे के साथ बड़ी problem होती है. हर कोई उसे समझाना चाहता है…. उसे कोई समझना नहीं चाहता….

स्कूल में अक्सर बच्चों को पकड़ के प्रिंसिपल के ऑफिस में लाया जाता है. ऐसा आमतौर पर तब होता है जब मामला बेहद गंभीर हो. तब जब बात क्लास टीचर के स्तर से ऊपर चली जाती है.

ऐसी दशा में जब बच्चे को प्रिंसिपल के सामने पेश किया जाता है तो उसकी वही मनोदशा होती है जो कसाई के सामने बकरे की होती है….

दूसरी बात मैंने आम तौर पर स्कूलों में ये देखी है कि प्रिंसिपल अपनी इमेज स्कूल में जल्लाद जैसी बना के रखते हैं.

आजकल के प्राइवेट स्कूलों में तो ये माहौल है कि वहाँ बच्चा तो छोड़िये टीचर्स की भी टांगें कांपती हैं प्रिंसिपल के सामने जाने में.

मेरी सबसे अच्छी सबसे होनहार स्टूडेंट मेरी पत्नी ही रही हैं. मैंने उनसे डिस्कस किया…. “एक प्रिंसिपल की इमेज स्कूल में जल्लाद वाली क्यों होनी चाहिए?”

मैंने कहा, “लीडर को जल्लाद होना चाहिए क्या? स्कूल में मुख्य काम होता है सीखना-शिक्षण (learning)…. उद्योग में मुख्य कार्य होता है सृजन.

सबसे अच्छी learning या सृजन, प्यार और सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में होगा या आतंक के माहौल में?”

इसलिए मैडम जी ने पहले दिन से ही स्कूल में अपनी छवि एक माँ की बनायी. बच्चों के लिए भी और स्टाफ के लिए भी.

जब टीचर बच्चे को पकड़ के प्रिंसिपल के सामने पेश करती है तो उस से पहले क्लास में वो माहौल कायदे से खराब कर चुकी होती है.

और इस आशा में कि प्रिंसिपल अब इस बिगड़े आतंकी को सुधार देगी…. वो उसे सुप्रीम कोर्ट में पेश करती है….

अब उस दृश्य की कल्पना कीजिये कि एक डरा सहमा बच्चा लाया जा रहा है…. गिरफ्तार कर के…. जल्लाद के सामने…. ज़्यादातर ऐसे मामलों में बच्चा रोता हुआ पहुंचता है प्रिंसिपल ऑफिस में….

पर ये क्या…. वहाँ तो जाते ही सीन ही बदल गया…. “अरे क्या हुआ भाई…. क्या हुआ? मेरा बच्चा रो क्यों रहा है…. अरे इधर आओ….”

और उसे बुला लिया…. गोद में बैठा लिया…. दुलार-पुचकार के शांत किया….

मुकदमा हारते देख टीचर दलील पेश करती है…. “अजी बहुत बड़ा डाकू है ये….”

जज साहब चुप करा देते हैं…. आंसू पोंछे…. मुंह धुलवाया…. चॉकलेट. टॉफ़ी, कैंडी दी…. शांत किया…. प्यार किया…. 4-6 चुम्मियां लीं, वापस भेज दिया.

इस से क्या हुआ कि बच्चे में और प्रिंसिपल में परस्पर विश्वास का और प्रेम का माहौल बना.

फिर शाम को या अगले दिन…. प्रिंसिपल पहुंची क्लास में…. पूरा मामला देखा समझा और आज जबकि बच्चा शांत और सहज है उसे प्यार से हैंडल किया.

समस्या आम तौर पर बहुआयामी होती है…. हल भी बहुआयामी ही होते हैं…..

सूखे खेत में बीज नहीं फूटते. पहले खेत में अनुकूल माहौल तैयार करना पड़ता है…. अंकुरण के लिए नमी चाहिए.

समस्या निवारण (problem solving) के लिए पहले अनुकूल माहौल तैयार कीजिये. रेत को कितना ही पेर लो…. तेल नहीं निकलता…. charged atmosphere (गर्म माहौल) में कभी शान्ति की बात नहीं हो सकती.

problem solving से पहले अनुकूल माहौल बनाइये….. जल्लाद किसी को सुधार नहीं सकता. सिर्फ मार सकता है….

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