सोशल पर वायरल : ये दुनिया आभासी नहीं आभा-सी है

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ये लेख उनके लिए लिख रहा हूँ जो फेसबुक और सोशल मीडिया को हलके में ले रहे हैं अभी तक. आभासी दुनिया… virtual world कह के खारिज कर देते हैं.

आज आपको एक ऐसा किस्सा सुना रहा हूँ, एक दम सच्चा किस्सा, जिसे पढ़ के आपको लगेगा कि facebook की ये आभासी दुनिया शायद हमारी real दुनिया से ज़्यादा रियल है.

आज से कोई 4 साल पहले, एक नवयुवक की दोनों किडनी फेल हो गयी. उसकी गर्लफ्रेंड को जब उसकी बीमारी का पता चला तो वो उसे छोड़ गयी.

बीमारी… हाथ से फिसलती जिंदगी… ऐसी घनघोर निराशा के माहौल में उसकी मित्रता फेसबुक पर एक लड़की से हो गयी. लड़के ने उसे यूँ ही chat करते हुए अपनी बीमारी के बारे में बताया. हलके-फुल्के अंदाज़ में.

पर कुछ महीनों में मामला सीरियस हो गया. लड़की ने लड़के से पूछा… शादी करोगे मुझसे?

लड़के का परिवार हक्का-बक्का रह गया. पिता ने बहुत समझाया. ऊँच नीच बतायी. जिंदगी की कड़वी सच्चाइयाँ बतायी. लड़की टस से मस न हुई.

उधर लड़के का परिवार बेटे की बीमारी को ले के परेशान. किडनी फेल हो जाए तो अच्छे अच्छों के हौसले पस्त हो जाते हैं.

माँ बाप तो एकदम टूट ही जाते हैं.पर किसी तरह हौसला दिखाते हैं. मरीज को हौसला देते हैं. पर यहाँ मामला उलट था. यहाँ मरीज घर वालों को हौसला देता था.

वो कहता था… अबे काहे परेशान हो… देखो मुझे कुछ नहीं होगा… मैं इसे योग और प्राणायाम से ही ठीक कर लूंगा.

लड़का अपने positive attitude के बल पर अपनी बीमारी से लड़ रहा था. उधर लड़की के अपने तर्क थे.

वो कहती थी.. .ठीक है… नहीं करती तुम्हारे लड़के से शादी… जिस से तुम कहोगे उस से कर लूंगी…. पर गारंटी कार्ड भर के दोगे न? उसको कभी कुछ नहीं न होगा जीवन में… मत डरो… न डराओ… मैं ठीक कर लूंगी इसे….

इस द्वंद्व में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ. लड़के की बुआ ने किडनी दी. दुर्भाग्य से नयी किडनी भी ट्रांसप्लांट के अगले दिन ही फेल हो गयी.

शरीर में पानी भर गया. टाँगे सूज गयी. शरीर में 20 किलो पानी भर गया. दूसरी किडनी भी फेल हो जाए तो परिवार की मनोदशा की कल्पना की जा सकती है?

ऐसी दशा में बाप जब ICU में पहुंचा तो देखा कि लड़का रूम में टहल रहा है. लड़के ने बाप को तसल्ली दी. देखना कुछ नहीं होगा. मैं ठीक कर लूंगा इसे. योग और प्राणायाम से…

सब लोग हार मान चुके थे पर लड़का और वो लड़की हार मानने को तैयार न थे.

डॉक्टर्स ने 80 यूनिट ब्लड का इंतजाम करने को कहा… Plasma Phoresis कर के देख लेते हैं… डॉक्टर्स के अथक प्रयास, लडकी के प्यार की ताकत और लड़के के अदम्य साहस और positive mental attitude से किडनी बच गयी.

ट्रांसप्लांट के सिर्फ दो महीने बाद अपने माता-पिता से विद्रोह कर लड़की झोला-झंडा ले के आ गयी अपने नए घर. लो जी… अपन तो आ गए.

आज लड़का पूरी तरह स्वस्थ है. बहू, बहू नहीं घर की बेटी है… सबके दिलों पे राज करती है…. परिवार बेहद सुखी है… बहुत जल्दी घर में किलकारियां गूंजने वाली हैं…

positive mental attitude और सच्चे प्रेम की ताकत से पहाड़ भी हिलाए जा सकते हैं.

कहानी एकदम सच्ची है. नाम जानबूझ के नहीं लिखे हैं. पात्र यदि उचित समझेंगे तो स्वयं ही comment box में प्रकट हो जायेंगे.

अंत में 4 लाइन फेसबुक के लिए…. फेसबुक की इस आभासी (virtual) दुनिया ने असल जीवन में इतने खूबसूरत दोस्त दिए हैं और इतनी सच्ची इतनी पवित्र प्रेम कहानियां दी हैं कि धन्यवाद के शब्द नहीं मिलते. बस जिंदगी को देखने के लिए नज़रिया चाहिए.

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