Joint Ventures : स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे क्रांतिकारी फैसला

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प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने ये किस्सा सुनाया था.

वो बताते हैं कि गुजरात के किसी एक शहर के बीचों-बीच, शायद अहमदाबाद ही था, एक रेलवे लाइन निकलती है. उस लाइन पर सारा दिन एकाध गाड़ी ही चलती है.

यानी रेलवे के एक इतने बड़े निवेश, इतने बड़े investment की, जिसमें इतनी ज़मीन फंसी हुई है देश की, इतना पैसा लगा है… पर उसका समुचित सदुपयोग नहीं हो पा रहा.

सो इस सन्दर्भ में मोदी जी तत्कालीन रेल मंत्री से मिले. उनको सुझाव दिया कि इस लाइन पर इस-इस तरह इतनी गाड़ियां चल सकती हैं. इस से इतनी जनता को ये-ये फायदा होगा.

रेल मंत्रालय ने कोई ध्यान न दिया. मोदी जी अगली बार फिर दिल्ली आये तो फिर मिले रेल मंत्री से. तत्कालीन प्रधानमंत्री से भी मिले. उनको भी सुझाव दिया. कुछ न हुआ.

सो अगली बार फिर जब मोदी जी यूपीए सरकार के रेल मंत्री से मिले तो कहा, यार तुमको अगर बहुत दिक्कत है तो हमको दे दो. हम तुमसे कुछ नहीं लेंगे. हम अपने संसाधनों से खुद उसपे अपनी गाड़ी चलवा लेंगे. गुजरात सरकार की रेल.

रेल मंत्री बोले, ऐसा कैसे हो सकता है. रेलवे की पटरी पर गुजरात सरकार अपनी गाड़ी कैसे चला लेगी?

मोदी ने कहा, क्यों नहीं हो सकता? अरे एक नियम ही तो है. बदल दो. और गुजरात सरकार की रेल चलनी है. कोई पाकिस्तान की थोड़े न चलनी है.

मनमोहन सिंह जी के प्रधानमंत्री रहते कुछ न हुआ.

आज मोदी सरकार ने स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे क्रांतिकारी फैसला लिया है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के federal structure यानी संघीय ढांचे को और ज़्यादा मज़बूती प्रदान कर दी. केंद्र और राज्य अब आपस में संयुक्त उपक्रम (joint ventures) शुरू कर सकते हैं.

सिर्फ इतना ही नहीं, राज्य भी आपस में मिल के एक-दूसरे के सहयोग से एक-दूसरे की territory यानी क्षेत्रों के अंदर joint ventures शुरू कर सकते हैं.

रेल मंत्री सुरेश प्रभु जी आज इस आशय की घोषणा की है. राज्यों को अब railways के साथ JV शुरू करने के रास्ते खुले. अब इस से देश में आधारभूत ढाँचे के विकास में तेज़ी आएगी.

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