जब फील्ड मार्शल मानेकशॉ ने इंदिरा से पूछा, क्या आपने बाईबल पढ़ी है?

An Interview with Field Marshal Sam Manekshaw
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अप्रैल का समय था या अप्रैल जैसा ही था. एक कैबिनेट मीटिंग में मुझे बुलाया गया. श्रीमती गांधी बहुत गुस्से में और परेशान थीं क्योंकि शरणार्थी पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा में आ रहे थे.

‘देखो इसे, अधिक-से-अधिक आ रहे हैं – असम के मुख्यमंत्री का तार, एक और तार….. से, इस बारे में आप क्या कर रहे हैं?’ उन्होंने मुझसे कहा.

मैंने कहा, ‘कुछ भी नहीं, इसमें मैं क्या कर सकता हूँ?’

उन्होंने कहा, ‘क्या आप कुछ नहीं कर सकते? आप क्यों कुछ नहीं करते?’

‘आप मुझसे क्या चाहती हैं?’

‘मैं चाहती हूँ कि आप अपनी सेना अंदर ले जाएँ.’

मैंने कहा, ‘इसका मतलब है – युद्ध?’

और उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता, यदि यह युद्ध है तो युद्ध ही सही.’

मैं बैठ गया और कहा, ‘क्या आपने ‘बाईबल’ पढ़ा है?’

सरदार स्वर्ण सिंह ने कहा, ‘अब इसका बाईबल से क्या वास्ता?’

‘बाईबल के पहले अध्याय के पहले अनुच्छेद में ईश्वर ने कहा है — ‘वहाँ प्रकाश हो तो वहाँ प्रकाश हो गया’, आपने भी वैसा महसूस किया. वहाँ युद्ध हो, और वहाँ युद्ध हो जाए. क्या आप तैयार हो?… मैं निश्चित रूप से तैयार नहीं हूँ.’

तब मैंने कहा, ‘मैं आपको बताऊँगा कि क्या हो रहा है. यह अप्रैल महीने का अंत है. कुछ दिनों में 15-20 दिनों में, पूर्वी पाकिस्तान में मानसून का प्रवेश होगा. जब बारिश होगी तो वहाँ की नदियाँ सागर में तब्दील हो जायेंगी.

यदि आप एक किनारे पर खड़े होंगे तो दूसरे किनारे को नहीं देख सकेंगे. अंततः: मैं सड़कों तक ही सीमित हो जाऊंगा.’ वायुसेना मुझे सहायता देने में अक्षम होगी और पाकिस्तानी मुझे परास्त कर देंगे – यह एक कारण है.

दूसरा मेरी कवचित डिवीज़न बबीना क्षेत्र में है, दूसरा डिवीजन – याद नहीं आ रहा है-सिकंदराबाद क्षेत्र में है. हम अभी फसल काट रहे हैं. मुझे प्रत्येक वाहन, प्रत्येक ट्रक, सभी सड़कें, सभी रेलगाडियां चाहिए होंगी, ताकि जवानों को रवाना कर सकूं. और आप फसलों को लाने-ले जाने में अक्षम होंगी.

फिर मैं कृषि मंत्री श्री फखरुद्दीन अली अहमद की ओर मुड़ा और कहा कि यदि भारत में भुखमरी हुई तो वे लोग आपको दोषी ठहराएंगे. मैं उस वक्त उस समय दोष सहने के लिए नहीं रहूँगा. तब मैंने उनकी तरफ घूमकर कहा, ‘मेरा कवचित डिवीज़न मेरा आक्रामक बल है. आप जानते हैं, उनके पास सिर्फ 12 टैंक हैं, जो सक्रिय हैं?’

वाई..बी.चव्हाण ने पूछा, ‘सैम, सिर्फ 12 क्यों?’

मैंने कहा, ‘सर, क्योंकि आप वित्त्त्मंत्री हैं. मैं आपसे कुछ महीनों से आग्रह कर रहा हूँ. आपने कहा, ‘आपके पास पैसे नहीं हैं, इसी कारण.’

तब मैंने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी, सन 1962 में आपके पिताजी ने एक सेना प्रमुख के रूप में जनरल थापर की जगह अगर मुझसे कहा होता, ‘चीनियों को बाहर फेंक दो.’ मैंने उनकी तरफ देखकर कहता, इन सब समस्याओं को देखिये. अब मैं आपसे कह रहा हूँ, ये समस्याएं हैं. यदि अब भी आप चाहती हैं कि मैं आगे बढूँ तो प्रधानमंत्रीजी, मैं दावा करता हूँ कि शत-प्रतिशत हार होगी. अब आप मुझे आदेश दे सकती हैं.’

तब जगजीवन राम ने कहा, ‘सैम, मान जाओ न.’

मैंने कहा, ‘मैंने अपना मत दे दिया है, अब सरकार निर्णय ले सकती है.’ प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा. उनका चेहरा लाल हो गया था. बोलीं, ‘अच्छा, कैबनेट में चार बजे मिलेंगे.’ सभी लोग चले गए. सबसे कनिष्ठ होने के कारण मुझे सबसे अंत में जाना था. मैं थोड़ा मुस्कराया.

‘सेनाध्यक्षजी, बैठ जाईये.’

मैंने कहा, ‘प्रधानमंत्रीजी, इससे पहले कि आप कुछ कहें, क्या आप चाहती हैं कि मानसिक या शारीरिक स्वास्थ्य के आधार पर मैं अपना इस्तीफा भेज दूं?’

उन्होंने कहा, ‘बैठ जाओ, सैम. आपने जो बातें बताईं, क्या वे सही हैं?’

‘देखिये, युद्ध मेरा पेशा है. मेरा काम लड़ाई करके जीतने का है. क्या आप तैयार हैं? निश्चित रूप से मैं तैयार नहीं हूँ. क्या आपने सब अंतर्राष्ट्रीय तैयारी कर ली है? मुझे ऐसा नहीं लगता है. मैं जानता हूँ, आप क्या चाहती हैं; लेकिन इसे मैं अपने मुताबिक, अपने समय पर करूँगा और मैं शत-प्रतिशत सफलता का वचन देता हूँ.

लेकिन मैं सब स्पष्ट करना चाहता हूँ. वहाँ एक कमांडर होगा. मुझे ऐतराज नहीं, मैं बी.एस.एफ., सी.आर.पी.एफ. या किसी के भी अधीन, जैसा आप चाहेंगी, काम कर लूंगा. लेकिन कोई सोवियत नहीं होगा, जो कहे कि मुझे क्या करना है. मुझे एक राजनेता चाहिए, जो मुझे निर्देश दे. मैं शरणार्थी मंत्री, गृहमंत्री, रक्षा मंत्री सभी से निर्देश नहीं चाहता. अब आप निर्णय कर लीजिए.’

उन्होंने कहा, ‘ठीक है सैम, कोई दखलअंदाजी नहीं करेगा. आप मुख्य कमांडर होंगे.’

‘धन्यवाद, मैं सफलता का दावा करता हूँ.’

इस प्रकार, फील्ड मार्शल के पद और बर्खास्तगी के बीच एक पतली सी रेखा थी. कुछ भी हो सकता था.
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मेजर जनरल शुभी सूद की लिखी पुस्तक ‘फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ’ से साभार.

(‘सोल्ज़र टॉक : एन इंटरव्यू विद फील्ड मार्शल सैम मानेकशा’, क्वार्टरडेक-1996, इ.एस.ए. द्वारा प्रकाशित, नौसेना मुख्यालय, नई दिल्ली, पृ. 10-11′ )

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