पाकिस्तान पड़ोस की वो लड़की है जिस से तुम्हें रह रह के इश्क़ हो जाता है

ऐ मुसलमाँ
देख रहा है न तू?
रो रहे हैं ……… middle east से लाखों मुसलमाँ Europe में शरण लिए हुए हैं। लाखों और आना चाहते हैं। आज लगभग समूची इस्लामिक दुनिया में ही उथल पुथल है। मुसलमाँ ही मुसलमाँ को मार रहा है। अपनों से हे लुट पिट के लोग शरणार्थी बनने को मजबूर हुए हैं।

ऐ मुसलमानों देख रहे हो न?

एक भी मुसलमाँ किसी इस्लामिक मुल्क में शरण नहीं मांग रहा।

संपन्न इस्लामिक मुल्क अपने ही मुसलमाँ भाइयों को शरण दे भी नहीं रहे। मुसलमाँ मुसलमाँ को अपने घर में घुसने नहीं देता। हमसे कहता है तुम रखो।

ऐ मुसलमानों…. देख रहे हो न….. तुम्हारे ऊपर जब विपत्ति आती है तो तुम्हारे अपने दीन वाले तुम्हारी तरफ देखते तक नहीं। वही तुम्हें दाना पानी देगा जिसे तुम काफ़िर कहते हो। जिस से तुम हमेशा लड़ते रहते हो।

ऐ हिन्दुस्तान के मुसलमानों… देख रहे हो न? कितने सुरक्षित हो तुम यहां हिन्दुस्तान में… हमारे बीच। कोई तुम्हें छू भी नहीं सकता। बराबर के अवसर मिलते हैं तुम्हें यहां। हिन्दुस्तान तुम्हें सिर आँखों पे बिठाता है। माना कि छोटी मोटी समस्याएं हैं। जहां चार बर्तन होते हैं खटकते ही हैं। पर ज़्यादातर सब ठीक है। आगे भी रहेगा।

पर तुम्हारी ये जो आदत है न, बहुसंख्यक समाज से हमेशा सींग फंसा के रखने की, इसी से खराबी पैदा होती है।

ये मुल्क तुम्हारा भी उतना ही है जितना हमारा। अबे तुम भी कोई अरब से नहीं आये थे न? यहीं के हो। कल तक यही पत्थर पूजते थे। हमारे ही भाई थे। अब नहीं पूजते। बस इतना ही तो बदला है? बाकी सब वही है।

सीरिया और अन्य देशों के शरणार्थियों के इस संकट से एक बात तो समझ आ गयी होगी कि अल्लाह न करे, कल को यहां कोई मुसीबत आई तो तुम्हें ये पाकिस्तान बांग्लादेश अफगानिस्तान मलेशिया इंडोनेशिया तुर्कमेनिस्तान कज़ाकस्तान ईरान इराक तो शरण नहीं ही देगा। वो पकिस्तान जिसकी ज़िंदाबाद के नारे कभी कभी कुछ नासमझ छोकरे लगा देते हैं यहां वहाँ… वो जिसके चौके छक्कों पे तुम खुश हो लेते हो…. वो जिस से तुम्हें कभी कभी एकतरफा इश्क़ हो जाता है….

डार्लिंग …….पाकिस्तान पड़ोस की वो लड़की है जिस से तुम्हें कभी कभी….. रह रह के…. इश्क़ हो जाता है।
पर तुम ये जान लो कि ये एकतरफा प्यार है। ये जितने भी हैं न सऊदी अरबिया और पकिस्तान जैसे… ये तुमसे बिलकुल प्यार नहीं करते… न जाने क्यों तुम्हीं इनके इश्क़ में मरे जा रहे हो और इनके लिए अपनी माँ से भाइयों से झगड़ लेते हो। इनके कमरे में एकाध रात तो बितायी जा सकती है पर उम्र नहीं।

तुम ये जान लो बेटा ……माँ माँ ही होती है। और ज़िन्दगी उसी के घर में सुकून से कटती है।
माना कि कभी हो जाती है नाराज़गी आपस में…. पर फिर कुछ देर बाद, गले लग के, रो के, मना लेते हैं इक दूजे को।

ऐ मुसलमानों…. अल्लाह न करे कि कभी वो दिन आये कि तुम्हें कहीं शरण मांगनी पड़ जाए।

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